दिनाकरण हैं तमिलनाडु के छुपे रुस्तम

By Jagatvisio :30-12-2017 08:20


चुनाव जीतने के बाद दिनकरण की प्राथमिकता वर्तमान सरकार को गिराने की होगी। वे कह भी चुके हैं कि यह सरकार मात्र तीन महीने की मेहमान है। सरकार गिराने के बाद वह अपने नेतृत्व में सरकार बनाना चाहेंगे। पलानीसामी के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल अभी भी साढ़े तीन साल बचा हुआ है और कोई विधायक मध्यावधि चुनाव नहीं चाहता। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन भी इस चुनावी नतीजे से निराश हैं। वे अपने नेतृत्व का सिक्का बैठाने में विफल रहे हैं। 

एक बार फिर तमिलनाडु चर्चा में है। इस बार राधाकृष्णन नगर (आरके नगर) विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव नतीजे के कारण यह चर्चा में है। इस उपचुनाव में ऑल इंडिया अन्ना डीएमके से निष्कासित टीटीवी दिनकरण की 40 हजार से भी ज्यादा मतों से जीत हुई है। इस नतीजे से यह भी पता चलता है कि तमिलनाडु चुनाव में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं है। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि भ्रष्ट छवि रखने वाले दिनकरण को जयललिता के इस चुनावी क्षेत्र से इस तरह की जबर्दस्त सफलता मिलेगी।

गौरतलब हो कि दिनकरण शशिकला नटराजन के भतीजे हैं। जब शशिकला एआईएडीएमके की जनरल सेक्रेटरी थीं, तो उन्होंने अपने भतीजे दिनकरण को पार्टी का डिपुटी जनरल सेक्रेटरी बना दिया था। उनके जेल में जाने के बाद उनकी जगह पर दिनकरण को ही पार्टी का सबसे बड़ा नेता माना जा रहा था। पर मुख्यमंत्री पलानीसामी ने पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम के साथ गठजोड़ कर लिया और दोनों ने मिलकर न केवल दिनकरण को, बल्कि उनकी बुआ शशिकला को भी पार्टी से बाहर कर दिया।

लेकिन आरके नगर विधानसभा के चुनावी नतीजे ने सबको अचंभे में डाल रखा है। इस नतीजे के बाद राज्य की राजनीति में राजनैतिक ताकतों के बीच फिर से नये समीकरण बन सकते हैं। इससे सबसे बड़ा झटका तो पलानीसामी- पन्नीरसेल्वम गठबंधन को लगा है, जो इस सीट पर चुनाव जीतकर शशिकला और उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी से बाहर निकालने के अपने निर्णय को सही ठहराना चाह रहा था।

 
दिनकरण की जीत भारी मतों से हुई है। सच तो यह है कि जीत के अंतर के मामले पर दिनकरण जयललिता पर भी भारी पड़ गए। जयललिता 39 हजार से कुछ ज्यादा मतों के अंतर से जीती थीं, जबकि दिनकरण 40 हजार से भी ज्यादा मतों के अंतर से जीते हैं। इस जीत के बाद उन्होंने दावा किया है कि पलानीसामी की राज्य सरकार तीन महीनों के अंदर गिर जाएगी।

सत्तारूढ़ पार्टी के पास दिनकरण को हराने के लिए बहुत से कारण थे। सबसे पहली बात तो यह थी कि पार्टी का लोकप्रिय चुनाव चिन्ह 'दो पत्तीÓ, जिस पर जयललिता चुनाव जीता करती थी, वह सत्तारूढ़ पार्टी के पास ही था। दूसरा, उसने मधुसूदनन के रूप में एक बड़ा चेहरा चुनाव में उतार रखा था। गौरतलब हो कि पार्टी के अंदर मधुसूदनन जयललिता के बाद दूसरे सबसे बड़े पोस्ट पर तैनात थे। तीसरी बात यह है कि सत्ता में होने के कारण सारी प्रशासनिक और पुलिस मशीनरी भी एआईएडीएमके के पास ही थी।

चुनाव जीतने के बाद दिनकरण की प्राथमिकता वर्तमान सरकार को गिराने की होगी। वे कह भी चुके हैं कि यह सरकार मात्र तीन महीने की मेहमान है। सरकार गिराने के बाद वह अपने नेतृत्व में सरकार बनाना चाहेंगे। पलानीसामी के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल अभी भी साढ़े तीन साल बचा हुआ है और कोई विधायक मध्यावधि चुनाव नहीं चाहता।
डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन भी इस चुनावी नतीजे से निराश हैं। वे अपने नेतृत्व का सिक्का बैठाने में विफल रहे हैं। अपने पिता के हाथ से पार्टी का कमान लेने के बाद अपने बूते चुनाव जीतने का उनका यह पहला मौका था। विरोध अन्नाडीएमके में पड़ी फूट का लाभ उठाने की कोशिश वे कर रहे थे, लेकिन वे उसका लाभ उठाना तो दूर, उनके उम्मीदवार की जमानत ही जब्त हो गई।

इसमें भारतीय जनता पार्टी की भी भारी जगहंसाई हो गई है। उसके उम्मीदवार को दो हजार वोट भी नहीं मिले। सच तो यह है कि नोटा को जितना वोट मिले, उससे भी कम वोट भाजपा उम्मीदवार को मिले।
 

Source:Agency