हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन..

By Jagatvisio :02-01-2018 06:30


2017 के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर मन की बात की। गिलास आधा पानी से भरा है और आधा हवा से भरा, वाले अंदाज में उन्होंने कई अच्छी-अच्छी बातें कींं। वर्ष 2000 में पैदा हुए बच्चे अब इस साल 18 बरस के होकर वोटर बन जाएंगे। इस वर्ग को मोदीजी ने खास तौर पर संबोधित किया और कहा कि भारतीय लोकतंत्र 21 वीं सदी के वोटरों का स्वागत करता है। यह यूथ आगे आए और तय करे कि कैसा हो यह भारत। आप भी आगे बढ़ें और देश आगे बढ़े। हम चिंतन करें कि कैसे हम उस भारत का निर्माण करें जिसका सपना महापुरुषों ने देखा है। उन्होंने कहा कि युवाओं का मतलब होता है, उमंग, उत्साह और ऊर्जा। इन युवाओं से हमारे न्यू इंडिया का सपना पूरा होगा। दिल्ली में े एक मॉक पर्लियामेंट के आयोजन की इच्छा भी प्रधानमंत्री ने जतलाई, और कहा कि इसमें हर जिले का युवक हो। युवा नए भारत के निर्माण के लिए मंंथन करें और नए रास्ते खोजें। े

देश की असली संसद को तो ठीक से चलवा पाने में सरकार को खासी मशक्कत करनी पड़ती है, हर बार सत्र का बड़ा हिस्सा हंगामे की भेंट चढ़ता है। ऐसे में मॉक पर्लियामेंट में देश की गंभीर समस्याओं पर किस तरह का मंथन युवा करेंगे, ये तो मोदीजी ही बतला सकते हैं। बहरहाल, मोदी ने अपने मन की बात कही। न्यू इंडिया का सपना दिखाया। लेकिन अभी के इंडिया की हकीकत क्या है, इसका जवाब संसद से निकल कर आया है। अभी चल रहे शीतकालीन सत्र में यह जानकारी सामने आई है कि गुजरे साल केेंद्र सरकार ने रोजगार के अवसरों में सबसे ज्यादा कटौती की है। केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में चार लाख से ज्यादा पद खाली हैं। कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2016-17 में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा भरे जाने वाले पदों में सन 2014-15 के मुकाबले साढ़े बारह हजार से भी ज्यादा की कमी आई है।

केंद्र सरकार के सिविल कर्मचारी के वार्षिक वेतन एवं भत्ता रिपोर्ट के मुताबिक एक मार्च 2016 तक विभिन्न मंत्रालयों, विभागों में कुल मंजूर पदों की संख्या 36 लाख 33 हजार 935 है, जिसमें अभी चार लाख 12 हजार 752 पद रिक्त ही हैं। इसी तरह लोकसभा में रेल राज्यमंत्री राजेन गोहेन ने जानकारी दी कि रेलवे के सभी जोन में अप्रैल 2017 तक सुरक्षा से जुड़े एक लाख 28 हजार 942 पद खाली हैं। चालकों सहित लोको संचालन में खाली पदों की संख्या 17 हजार 457 है। मंत्री महोदय इन रिक्त पदों पर जल्द भर्ती का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जन्नत की हकीकत तो सभी को मालूम है। 2017 के बजट सत्र में भी संसद में जानकारी दी गई थी कि वर्ष 2015 में हुई केंद्र सरकार की सीधी भर्तियां 2013 के मुकाबले 89 प्रतिशत कम थीं। बेरोजगारी की जो दशा संसद में बतलाई जा रही है, देश में हालात उससे कहीं अधिक गंभीर हैं।

सरकार केवल सरकारी नौकरियों की बात कर रही है। लेकिन नोटबंदी के कारण देश में जो नौकरियां चली गईं, उस बारे में तो चर्चा ही नहीं ेहो रही। बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों में 2016-17 में 66 हजार नए कर्मचारी नौकरी पर रखे गए, जबकि इसके पिछले साल यानी 2015-16 में यह संख्या 1 लाख 23 हजार थी। यानी नई नौकरियां पाने वाले आधे रह गए। एसोचैम की रिपोर्ट है कि बी कैटेगरी के बिजनेस स्कूल्स से निकलने वाले केवल 20 प्रतिशत युवाओं को नौकरियां मिलीं। प्रबंधन के अलावा इंजीनियरिंग में भी रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। जबकि एक वक्त इन दो क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नौकरियां हुआ करती थीं। 

 
सरकार बेरोजगारी को लेकर कितनी संवेदनहीन हो चुकी है, इसका एक नमूना पिछले शुक्रवार राज्यसभा में देखने मिला। जब सपा सांसद विश्वम्भर प्रसाद निषाद ने 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के बेरोजगार नागरिकों के लिए बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान करने का प्रस्ताव किया। संविधान संशोधन से संबंधित इस गैर सरकारी सदस्य विधेयक पर चर्चा के दौरान इसका विरोध करते हुए राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि देश के युवा बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देकर आश्रित बनाने के स्थान पर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ज्यादा श्रेयस्कर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। श्री पोद्दार ने सरकार के प्रति अपनी निष्ठा दिखला दी। लेकिन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्टार्टअप इंडिया और मुद्रा योजना आदि सरकारी कार्यक्रमों की असलियत यह है कि दस हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत अब तक मात्र 5 करोड़ 66 लाख रुपये जारी हुए हैं, जबकि मुद्रा योजना में सरकार ने ब्याज दर 11.25 प्रतिशत से 11.75 प्रतिशत रखी है, जो बाजार से कहीं ऊंची है।

देश में अभी 12 करोड़ बेरोजगार युवा हैं और आने वाले समय में यह संख्या सरकार की मेहरबानी से कहां तक पहुंचेगी, कहा नहीं जा सकता। बेरोजगारी की कड़वी हकीकत का एक नमूना कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देखने मिला था, जहां डीके सरकारी अस्पताल में वार्ड बॉय और चपरासी के कुल 121 पदों के लिए करीब पंद्रह हजार नौ-जवान अपना फॉर्म जमेा कराने उमड़ पड़े थे। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास ही मांगी गई थी, लेकिन आवेदक युवाओं में कई स्नातेकोत्तर और इंजीनियरिंग की डिग्री लिए हुए थे। रायपुर का यह दृश्य चेावल का एक दाना भर था, जिससे न्यू इंडिया की हकीकत समझी जा सकती है। 

Source:Agency