जीएसटी ही नहीं रियल एस्टेट पर लग सकते हैं ये 2 अन्य टैक्स

By Jagatvisio :05-01-2018 07:14


नई दिल्ली । सरकार रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। माना जा रहा है कि जीएसटी काउंसिल की 18 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। केंद्र ने जो विकल्प राज्यों को सुझाया है, उसमें जीएसटी के दायरे में रियल एस्टेट के आने के बाद भी स्टांप ड्यूटी व प्रॉपर्टी टैक्स को बरकरार रखा जा सकता है।

सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में पहल करते हुए जीएसटी काउंसिल की 10 नवंबर को गुवाहटी में हुई 23वीं बैठक के एजेंडा में एक पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन रखा था, लेकिन समयाभाव के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। इसीलिए अब आगामी बैठक में इस पर चर्चा होने के आसार हैं। सूत्रों ने कहा कि इससे केंद्र व राज्य सरकारों को अधिक राजस्व मिलेगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा से बंदरगाह, हवाई अड्डे और होटल जैसे व्यवसायों को लाभ मिलेगा। रियल एस्टेट में काले धन के खिलाफ भी यह अहम कदम होगा।

फिलहाल रियल एस्टेट पर मुख्यत: चार प्रकार के टैक्स व शुल्क लगते हैं, जिनमें स्टांप ड्यूटी, प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्ट्रेशन फीस और भवन निर्माण पर सेस शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि रियल एस्टेट पर जीएसटी लागू करने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स और स्टांप ड्यूटी को बरकरार रखा जा सकता है, जबकि बिल्डिंग सेस को जीएसटी में ही समाहित किया जा सकता है। जमीन की बिक्री पर राज्य सरकारें स्टांप शुल्क लगाती हैं। स्टांप शुल्क की दर भी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। कुछ राज्यों में तो यह आठ फीसद तक है।

नीति आयोग ने अपने त्रिवर्षीय एक्शन एजेंडा में भी स्टांप ड्यूटी घटाने की वकालत की है। सूत्रों ने कहा कि रियल एस्टेट पर जीएसटी लगाने के लिए सीजीएसटी और एसजीएसटी कानूनों में संशोधन की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत पड़ेगी या नहीं। इस संबंध में सूत्रों का कहना है कि कानून मंत्रलय की राय लेनी पड़ेगी।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी लागू करने से पहले चल और अचल संपत्ति की परिभाषा भी तय करनी होगी। उल्लेखनीय है कि काउंसिल के कुछ सदस्यों ने रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग उठाई थी, जिसके बाद इस बारे में विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी कहा है कि अगर जमीन और रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया तो काले धन का सृजन नहीं रुकेगा। इससे पहले 13वें वित्त आयोग ने भी रिहायशी और व्यावसायिक दोनों प्रकार के रियल एस्टेट सेक्टर को इस कर के दायरे में लाने की सिफारिश की थी।

Source:Agency