महाशिवरात्रि पर ऐसा विशेष संयोग, फलदायी होगा पूजन

By Jagatvisio :06-02-2018 07:50


रायपुर। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी 13 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर भौम प्रदोष पर सिद्धि योग का संयोग है। इस संयोग में भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जा रही है। ज्योतिषी डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि मंगलवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सिद्धि योग तथा गर करण के साथ आ रही है।

त्रयोदशी के दिन मंगलवार होने से भौम प्रदोष का संयोग भी बन रहा है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में महाशिवरात्रि जैसे पर्व का संयोग बनता है तो वह शुभ फलदायी माना जाता है। शिव महापुराण में सप्ताह के सात दिन में शिव की अलग-अलग साधना का विधान है।

27 नक्षत्रों में भी शिव की साधना नक्षत्र के अधिपति के साथ की जाती है। महाशिवरात्रि पर पड़ रहे उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शिव हैं। इस नक्षत्र को कार्यसिद्धि के लिए विशेष माना गया है। महाशिवरात्रि पर प्रदोष काल से निषिथ काल (मध्यरात्रि के बाद) तक भगवान शिव की अलग-अलग कामना से पूजा आराधना करने का विशिष्ट फल मिलेगा।

शिवपूजा से ऐश्वर्य प्राप्ति

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का पूजन प्रातःकाल, मध्यान्ह, सायंकाल और मध्य रात्रि के समय करने से समस्त ऐश्वर्यों की प्राप्ति होगी।

शिवलिंग का प्रादुर्भाव और शिव-विवाह

शास्त्रों में मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। यह भी मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती विवाह बंधन में बंधे थे।

गन्ना रस व पंचामृत से करें शिवलिंग अभिषेक

महाशिवरात्रि पर शिवजी को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, जल अर्पित करने से कष्ट दूर होंगे। शिवजी का गन्ने के रस व पंचामृत से अभिषेक करने पर आर्थिक उन्नति होगी। भावनात्मक कष्टों, वैवाहिक परेशानियों और पारिवारिक असंतोष से मुक्ति मिलेगी।

हटकेश्वर महादेव मंदिर में सहस्त्राभिषेक

महादेव घाट स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुरेश गिरी गोस्वामी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर दो दिन उत्साह का माहौल रहेगा। 12 फरवरी को फूलों से श्रृंगार किया जाएगा और 13 फरवरी को सुबह 3 बजे महाआरती के बाद श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।

गर्भगृह के बाहर से पात्र में जल अर्पण

महाशिवरात्रि पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए हटकेश्वर महादेव के गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। हटकेश्वर महादेव शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए मुख्य द्वार पर तांबे के बड़े पात्र में जल अर्पण की व्यवस्था की जा जाएगी। श्रद्धालु मुख्य द्वार के बाहर तांबे के पात्र में जल अर्पित करेंगे। यह जल पाइप के माध्यम से भीतर गर्भगृह में शिवलिंग पर अर्पित होगा।
 

Source:Agency