बजट : खेल के साथ खिलवाड़ करेंगे तो नहीं मिल पाएगा पदक

By Jagatvisio :08-02-2018 08:09


रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विकास का दिशा में तेजी से अग्रसर है। खेल जगत में भी छत्तीसगढ़ तेजी से विकास कर रहा है। 2018 का बजट 10 फरवरी को जारी होने वाला है। खेल जगत से जुड़े लोगों को इस बार बजट से काफी उम्मीदें हैं।

2019 में प्रस्तावित नेशनल गेम्स को देखते हुए खेल बजट काफी अहम है। सरकार को खेल और खिलाड़ी दोनों को देखते हुए बजट जारी करना होगा। अब तक के बजट से खिलाड़ी अछूते रहे हैं। इस बार के बजट से खिलाड़ी और खेल संघ दोनों को काफी उम्मीदें हैं।

कई ऐसी मांगें हैं जो सालों से की जा रही है वह अब तक पूरी नहीं हुई। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आगामी नेशनल गेम्स में पदक जीतना है तो इस बार का बजट खिलाड़ियों के खेल को बढ़ावा देने के आधार पर होना चाहिए। प्रदेश का खेल बजट 122 करोड़ स्र्पए है।

राज्य स्तरीय स्पोर्ट्स एकेडमी खेलों को बढ़ावा देने प्रदेश में एक राज्य स्तरीय स्पोर्ट्स एकेडमी खुलनी चाहिए, जिसमें 10 ओलिंपिक गेम्स के खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। अब तक प्रदेश में कोई भी ऐसी एकेडमी नहीं है। जिस तरह से केंद्र सरकार द्वारा जगहजगह पर साईं सेंटर खोले गए हैं उसी तरह राज्य को भी करना होगा।

इस एकेडमी में सभी खेलों के लिए अधोसंरचना भी जरूरी है। जमीनी स्तर पर करना होगा काम खेल जगत में अगर बढ़ावा देना है तो सबसे पहले जमीनी स्तर पर काम करना होगा। मतलब स्कूलों में ही खेल अनिवार्य होना चाहिए।

प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मामना है कि अब वो समय आ गया है जब राज्य सरकार को स्कूल शिक्षा में खेल विषय अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। स्कूलों में खेल कैलेंडर के साथ सभी विषय की तरह इसकी पढ़ाई होनी चाहिए। स्कूल खेल के लिए अलग से बजट होना चाहिए।

जीएसटी खिलाड़ियों पर पड़ रही भारी एक तरफ जहां खेल को बढ़ावा देने कई योजनाएं चलाई जा रही वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों पर जीएसटी भारी पड़ रहा है। खेल उपकरण जीएसटी आने के बाद काफी महंगे हो गए हैं। सीधे तौर पर 18 फीसदी जीएसटी लग रहा है। राज्य सरकार को खेल उपकरणों पर सब्सिडी देनी चाहिए, जिससे खिलाड़ी आसानी से उपकरण खरीद सकें।

खेल संघों को अनुदान राशि मात्र 30 हजार स्र्पए

खेल संघों द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय खेलों के लिए खेल विभाग की ओर से 30 हजार स्र्पए अनुदान दिया जाता है। जबकि खेल संघों का कहना है कि खिलाड़ियों के रूकने और उनके खाने में खर्च की राशि इतनी है कि कई खेल संघ आयोजन ही नहीं करवा पाते हैं। मांग है कि जो आयोजन खेल संघ करवाते हैं वो खेल विभाग के अंडर में होना चाहिए जो इससे पहले होता रहा है।
 

Source:Agency