शिमला समझौता इंदिरा गांधी की जीत का दस्तावेज

By Jagatvisio :09-02-2018 08:12


बंगलादेश का गठन इंसानी हौसलों की फतेह का एक बेमिसाल उदाहरण है। जब से शेख मुजीब ने ऐलान किया था कि पाकिस्तानी फौजी हुकूमत से सहयोग नहीं किया जाएगा, उसी वक्त से पाकिस्तानी फौज ने पूर्वी पाकिस्तान में दमनचक्र शुरू कर दिया था। सारा राजकाज सेना के हवाले कर दिया गया था और वहां फौज अत्याचार कर रही थी। उसी अत्याचार ने बंगलादेश के गठन की प्रक्रिया को तेज  किया था। बंगलादेश की स्थापना में भारत और उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बहुत बड़ा योगदान है। सच्चाई यह है कि अगर भारत का समर्थन न मिला होता तो शायद बंगलादेश का गठन अलग तरीके से हुआ होता। 

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाये  गए धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिमला समझौते का भी किया। उनके मुंह से यह निकल गया कि समझौता इंदिरा गांधी और बेनजीर भुट्टो के बीच हुआ था। यह स्लिप आफ टंग का नतीजा है। वास्तव में समझौता इंदिरा गांधी और बेनजीर भुट्टो के पिता जुल्फकार अली भुट्टो के बीच हुआ था।  लेकिन यह  शिमला समझौते के बारे में जानकारी ताजा कर लेने का अवसर है। बंगलादेश के संस्थापक, शेख मुजीबुर्रहमान को तत्कालीन पाकिस्तानी शासकों ने जेल में बंद कर रखा था लेकिन उनकी प्रेरणा से शुरू हुआ बंगलादेश की आजादी का आन्दोलन भारत की मदद से परवान चढ़ा और एक नए देश का जन्म हो गया।

 बंगलादेश का जन्म वास्तव में दादागिरी की राजनीति के खिलाफ इतिहास का एक तमाचा था जो शेख मुजीब के माध्यम से पाकिस्तान के मुंह पर वक्त ने जड़ दिया था। आज पाकिस्तान जिस अस्थिरता के दौर में पहुंच चुका है उसकी बुनियाद तो उसकी स्थापना के साथ ही 1947 में रख दी गई थी लेकिन इस उप महाद्वीप की 60 के दशक की घटनाओं ने उसे बहुत तेज रफ्तार दे दी थी। यह पाकिस्तान का दुर्भाग्य था कि उसकी स्थापना के तुरंत बाद ही मुहम्मद अली जिन्नाह की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के मूल निवासी लिया$कत अली देश के प्रधानमंत्री थे। उनको पंजाबी आधिपत्य वाली पाकिस्तानी फौज और व्यवस्था के लोग अपना बंदा मानने को तैयार नहीं थे, और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। उसके बाद से ही वहां गैर हुकूमतों के दौर का आगाज हो गया। बंगलादेश के जन्म के समय पाकिस्तान के शासक जनरल  याह्या खां थे।

ऐशोआराम की दुनिया में डूबते-उतराते, जनरल याह्या खां ने पाकिस्तान की सत्ता को अपने क्लब का ही विस्तार समझ रखा था। मानसिक रूप से कुंद, याह्या खां किसी न किसी की सलाह पर ही काम करते थे। कभी प्रसिद्ध  गायिका नूरजहां की राय मानते, तो कभी जुल्फिकार अली भुट्टो की बात मानते थे। सत्ता हथियाने की अपनी मुहिम के चलते जुल्फकार अली भुट्टो ने याह्या खां से थोक में मूर्खतापूर्ण फैसले करवाए। जब संयुक्त पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेम्बली (संसद) में शेख मुजीबुर्रहमान की पार्टी, अवामी लीग को स्पष्ट बहुमत मिल गया तो भी उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाना ऐसा ही फैसला था। पश्चिमी पाकिस्तान की मनमानी के खिलाफ पूर्वी पाकिस्तान में पहले से ही गुस्सा था और जब उनके अधिकारों को साफ नकार दिया गया तो पूर्वी बंगाल के लोग सड़कों पर आ गए। मुक्ति का युद्ध शुरू हो गया, मुक्तिवाहिनी का गठन हुआ और स्वतंत्र बंगलादेश की स्थापना हो गई।

बंगलादेश का गठन इंसानी हौसलों की $फतेह का एक बेमिसाल उदाहरण है। जब से शेख मुजीब ने ऐलान किया था कि पाकिस्तानी फौजी हुकूमत से सहयोग नहीं किया जाएगा, उसी वक्त से पाकिस्तानी फौज ने पूर्वी पाकिस्तान में दमनचक्र शुरू कर दिया था। सारा राजकाज सेना के हवाले कर दिया गया था और वहां फौज अत्याचार कर रही थी। उसी अत्याचार ने बंगलादेश के गठन की प्रक्रिया को ते•ा  किया था। बंगलादेश की स्थापना में भारत और उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बहुत बड़ा योगदान है। सच्चाई यह है कि अगर भारत का समर्थन न मिला होता तो शायद बंगलादेश का गठन अलग तरीके से हुआ होता। बंगलादेश की स्थापना में भारत के सहयोग के बाद भारत और पाकिस्तान में रिश्ते बहुत बिगड़  गए थे। पाकिस्तान पराजित मुल्क था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फकार अली भुट्टो के खिलाफपाकिस्तान में माहौल बन गया था। अपने देश में मुंह  छुपाने के और अपमान से बचने के लिए उनको भारत से कुछ मदद चाहिए थी। उसी पृष्ठभूमि में शिमला समझौता हुआ था।

शिमला समझौता भारतीय कूटनीति की बहुत बड़ी सफलता है। बंगलादेश की धरती पर बलूचिस्तान के टिक्का खां की रहनुमाई में बलात्कार लूट और कत्ल कर रही पाकिस्तानी सेना को भारतीय सेना के सहयोग से मुक्तिवाहिनी ने पराजित किया था। पाकिस्तानी राष्ट्रपति, याह्या खां को हटाकर उनके विदेश मंत्री जुल्फकार अली भुट्टो अपने देश की सत्ता हथिया चुके थे। अपने देशवासियों को उन्होंने मुगालते में रखा था कि उनकी सेना भारत और बंगलादेश की साझी ताकत पर भारी पड़ेगी और बार-बार डींग मारते रहते थे कि वे भारत से एक हजार साल तक युद्ध कर सकते थे लेकिन पाकिस्तानी फौज के करीब 1 लाख सैनिकों ने भारत के पूर्वी कमान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

आल इण्डिया रेडियो पर रोज पकड़े गए पाकिस्तानी सैनिकों की आवाज में 'हम खैरियत से हैं' कार्यक्रम के तहत प्रसारण किया जाता था। किसी भी सेना के लिए इस से बड़ा अपमान क्या हो सकता था कि उसके सिपाही युद्धबंदी हों और रोज पूरे पाकिस्तान में लोग जानें कि उनके देश के करीब 1 लाख सैनिक भारत के कब्जे में हैं। शिमला समझौता इसी दौर में हुआ था। पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधि जुल्फकार अली भुट्टो थे, उनके साथ उनकी बेटी, बेनजीर भुट्टो भी आई थीं और अखबारों में उन पर खासी चर्चा होती थी। उन दिनों वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय थीं। उनकी उम्र उस वक्त यही बीस एक साल रही होगी। उस समझौते के मुख्य बिन्दुओं को याद कर लेना है जिससे कि आने वाली पीढ़ियां बाखबर रहें। 

समझौते के बिंदु

1. भारत और पाकिस्तान की सरकारें इस बात पर सहमत हैं कि दोनों देश संघर्ष और झगड़े को समाप्त कर दें जिसकी वजह से अब तक दोनों देशों के बीच में रिश्ते खराब रहे हैं। दोनों देश आगे से ऐसा काम करेंगे जिससे दोस्ताना और भाईचारे के रिश्ते कायम हो सकें और उप महाद्वीप में स्थायी शान्ति की स्थापना की जा सके। इसके बाद दोनों देश अपनी ऊर्जा और अपने संसाधनों का इस्तेमाल अपनी जनता के कल्याण के लिए कर सकेंगे। इस मकसद को हासिल करने के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच एक समझौता हुआ जिसकी शर्तें निम्नलिखित हैं- 

क. यह कि दोनों देशों के बीच के संबंधों को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के हिसाब से चलाया जाएगा। 

ख. यह कि दोनों देशों ने तय किया है कि अपने मतभेदों को शान्ति पूर्ण तरीकों से आपसी बातचीत के •ारिये ही हल करेगें या ऐसे तरीकों से हल करेंगे जिन पर दोनों देश सहमत हों। दोनों देशों के बीच में जो ऐसी समस्याएं हैं जिनका अभी हल नहीं निकला है, उनके अंतिम समाधान के पहले दोनों देश ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे कि आपसी रिश्तों में और खराबी आये और शान्तिपूर्ण माहौल बनाए रखने में दिक्$कत हो। 

ग. यह कि दोनों देशों के बीच सुलह, अच्छे पड़ोसी की तरह आचरण और टिकाऊ शान्ति के लिए •ारूरी है कि दोनों देश शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व, एक-दूसरे की क्षेत्रीय एकता और संप्रभुता का सम्मान और एक-दूसरे के आतंरिक मामलों में दखलंदाजी न करें और रिश्तों की बुनियाद बराबरी और आपसी लाभ की समझ पर आधारित हो। 

घ. यह कि पिछले 25 वर्षों से दोनों देशों के बीच जिन कारणों से रिश्ते खराब रहे हैं, उनके बुनियादी सिद्धांतों और कारणों को शान्तिपूर्ण तरीकों से हल किया जाए। 

च. यह कि दोनों एक-दूसरे की राष्ट्रीय एकता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता संप्रभुता का बराबरी के आधार पर सम्मान करेंगे। 

छ. यह कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के आधार पर दोनों एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ न तो बल का प्रयोग करेंगे और न ही धमकी देंगे।  

 
2. दोनों देशों की सरकारें अपनी शक्ति का प्रयोग करके एक-दूसरे के खिलाफ कुप्रचार पर रोक लगाएगी। दोनों देश ऐसी सूचना के प्रचार प्रसार को बढ़ावा देंगे जिससे दोनों देशों के बीच दोस्ती के रिश्ते बनने में मदद मिले। 

3. दोनों देशों के बीच $कदम बा $कदम रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए निम्नलिखित बातों पर सहमति हुई-

क. ऐसे कदम उठाये जायेंगे जिससे संचार, डाक, तार समुद्र-•ामीन के रास्ते संपर्क  बहाल हो सके। इसमें एक-दूसरे की सीमा के ऊपर से विमानों की आवाजाही भी शामिल है। 

ख. एक-दूसरे के नागरिकों की यात्रा सुविधा को बढ़ाने के लिए $कदम उठाये जायेंगे। 

ग. जहां तक संभव हो उन क्षेत्रों में व्यापार शुरू किया जायेगा जिसके बारे में सहमति हो चुकी है। 

घ. विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में आदान प्रादान को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस सन्दर्भ में दोनों देशों के प्रतिनिधि मंडल समय-समय पर मिला करेंगे और तफसील पर काम होगा।

4. टिकाऊ शान्ति स्थापित करने की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए दोनों सरकारें निम्नलिखित बातों पर सहमत हुईं। 

क. भारतीय और पाकिस्तानी सेनायें अंतरराष्ट्रीय सीमा में अपनी तरफ तक वापस चली जाएंगी। 

ख. जम्मू और कश्मीर में जहां 17 दिसंबर 1971 के दिन सीज फायर हुआ था, दोनों देश उसी को लाइन ऑफ कंट्रोल के रूप में स्वीकार करेंगे। लेकिन इससे कोई भी देश अपने अधिकार को तर्क नहीं कर रहा है। कोई भी देश इस सीमा को आपसी मतभेद या कानूनी व्याख्या के मद्देन•ार बदलने की कोशिश नहीं करेगा। लाइन ऑफ कंट्रोल पर किसी तरह की ता$कत का न तो इस्तेमाल होगा और न ही धमकी दी जायेगी।
ग. सेनाओं की वापसी का काम इस समझौते के लागू होने पर शुरू होगा और 30 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। 

5. यह समझौता दोनों देशों के संविधान के अनुसार उनके देशों में लागू संविधान के अनुसार मंजूर किया जाएगा। उसके बाद ही इसे लागू माना जाएगा। 

6. दोनों सरकारें इस बात पर सहमत हैं दोनों ही सरकारों के मुखिया फिर मिलेंगे। इस बीच दोनों सरकारों के प्रतिनिधि मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि टिकाऊ शान्ति स्थापित करने और रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए क्या तरीके अपनाए जाएं। इसमें युद्ध बंदियों सम्बन्धी मुद्ददे, जम्मू-कश्मीर के स्थायी समझौते की बात और फिर से कूटनीतिक सम्बन्धों की बहाली शामिल है। 

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य इलाके में शान्ति स्थापित करना था लेकिन 1971 की लड़ाई से उपजे मामलों को हल करने के अलावा इस से कुछ खास हासिल नहीं किया जा सका। भुट्टो को भी फौज ने सत्ता से हटा दिया और इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा कर देश की जनता के सामने अपना सब कुछ गंवा दिया और 1977 का चुनाव हार गईं। 

बाद में बहुत दिनों तक भारत की ओर से यह शिकायत की जाती रही कि पाकिस्तान शिमला समझौते को नहीं मान रहा है लेकिन पाकिस्तान ने कभी परवाह नहीं की।  शीतयुद्ध का  था और पाकिस्तान अमेरिका का $खास कृपापात्र था। लेकिन दुनिया के राजनयिक इतिहास में शिमला समझौते का एक महत्व है। कांग्रेस के खिलाफ संसद में भाषण करते सत्तापक्ष को ध्यान रखना पड़ेगा कि जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने देश को बहुत ही ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया था।
 

Source:Agency