नक्सल इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने की तैयारी

By Jagatvisio :12-02-2018 06:21


रायपुर। बजट में प्रदेश में सड़कों और पुलों का जाल बिछाने के लिए करीब 9 सौ करोड़ की राशि रखी गई है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा नक्सल इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने पर व्यय किया जाएगा। बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर और कांकेर जिलों में राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न् योजनाओं के तहत सड़कों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है।

एलडब्ल्यूई (वामपंथी उग्रवाद) प्रभावित जिलों में पहले से ही सड़कों के निर्माण का काम चल रहा है। राज्य सरकार ऐसी सड़कों का निर्माण करने में जुटी है जो पिछले कई दशकों से नक्सली दहशत से बंद थीं। इन इलाकों में कई ऐसी सड़कें हैं जिनका पहले टेंडर भी किया गया लेकिन ठेकेदार सामने नहीं आए।

अब सरकार पुलिस सुरक्षा के साए में सड़कों का निर्माण करा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने में सड़कों का विकास बेहद अहम है। सरकार की पहुंच अंदरूनी इलाकों तक बनेगी तो ग्रामीणों से सीधा संपर्क भी बनेगा।

नक्सलवाद से लड़ाई विकास के रास्ते ही जीती जा सकती है। बीजापुर से जगरगुंडा तक 70 किमी सड़क का काम चल रहा है। यह सड़क तीन दशक से बंद है। बारसूर से जगरगुंडा होते हुए तेलंगाना की सीमा पर स्थित मरईगुड़ा तक 97 किमी सड़क पर बीच-बीच में काफी काम हो चुका है।

शेष काम इस साल किया जाएगा। बस्तर जिले में जगदलपुर से कोलेंग तक नई सड़क का प्रस्ताव है। जीरम घाट से आसपास के गांवों को सीधी सड़कों से जोड़ने से नक्सलियों को पीछे धकेलने में मदद मिलेगी।

नारायणपुर जिले में अंतागढ़-धनोरा-बेड़मा मार्गा पर 29 किमी सड़क का प्रस्ताव है। इस सड़क का निर्माण पहले से चल रहा है। अबूझमाड़ की सीमा पर पल्ली-बारसूर सड़क को भी खोला जा रहा है। 43 किमी लंबी इस सड़क पर काम शुरू हो चुका है। बीजापुर जिले के नेसलनार से कोडोली और मिरतुर तक सड़क का काम भी किया जा रहा है। बीजापुर और सुकमा जिलों में कई सड़कों और पुलों का काम प्रस्तावित है।

Source:Agency