बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि, छलक पड़े लोगों के आंसू

By Jagatvisio :12-02-2018 06:24


खरोरा, बालोद बाजार । वक्त बदल रहा है और साथ ही बदल रही है समाज की सोच। नगर में पहली बार परंपराओं से हटकर नगर की एक बेटी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया। मृतक का कोई बेटा नहीं था बल्कि दो बेटियां थीं।

शमशान पर उस समय लोगों के आंसू छलक पड़े जब एक बेटी ने श्मशान में रुढ़ीवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उसने बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया जिसकी हर किसी ने तारीफ की। अंतिम संस्कार में वह रोती रही, पापा को याद करती रही लेकिन बेटे की कमी को हर तरह से पूरा किया।

जानकारी के अनुसार नगर में ओमप्रकाश शर्मा का बीमारी के चलते निधन हो गया। शर्मा की दो बेटियां यशु व स्नेहा शर्मा हैं। बड़ी बेटी यशु शर्मा ने कहा कि उनके पिता की इच्छा थी कि बेटी उनका अंतिम संस्कार करें और उसने अपने पिता की आखिरी इच्छा पूरी की।

यशु कहती है कि समय से साथ सोच बदलने की जरूरत है। आज से समय में बेटा-बेटी बराबर है। ओमप्रकाश की मृत्यु के बाद उनकी दोनों बेटियों ने हिन्दू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार के सारे फर्ज पूरे किए।

दोनों बहनों की बेटे की तरह परवरिश

मृतक ओमप्रकाश शर्मा की पत्नी कुंजलता शर्मा का कहना है कि उसके पिता ने दोनों बेटियों को बेटों की तरह पाला है। वो दोनों बहनें ही हैं उनका कोई भाई नहीं है। उसके पिता ने कभी दोनों बहनों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया, सभी को अच्छी शिक्षा दिला रहे थे।

जो बेटे कर सकते हैं तो बेटियां क्यों नहीं

कुंजलता ने कहा कि आज जमाना बदल गया है। पुरानी कुरीतियां रही हैं कि दाह संस्कार का काम केवल बेटे ही कर सकते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है जमाना बदल रहा है। जो काम बेटे कर सकते हैं उस काम को बेटियां भी कर सकती हैं। आज लड़कियों का जमाना है यह हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

हम वे सभी कार्य करेंगे जो बेटे करते हैं

यशु ने कहा कि हमने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया है और हम वह सभी कार्य करेंगे जो एक बेटे को करनी चाहिए। इसके बाद सभी रिश्तेदारों ने एक राय होकर बेटी को ही अंतिम संस्कार के लिए आगे किया और उसे ढांढस बंधाया।
 

Source:Agency