महाशिवरात्रि: दोहरे संयोग, भगवान शिव के प्रिय नक्षत्र में करें पूजा

By Jagatvisio :14-02-2018 07:02


भारत के बहुत सारे स्थानों पर आज भी भोले बाबा का त्यौहार महाशिवरात्रि शिव भक्तों द्वारा बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज की तिथि अद्भुत और दुर्लभ संयोग लेकर आई है। भारतीय पंचांग और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार आज 14 तारीख पड़ रही है। भगवान शंकर का प्यारा नक्षत्र श्रवण भी है। माना जाता है की इसका स्वामी चन्द्र है। भोलेनाथ ने चन्द्रमा को अपनी शीश पर स्थान दिया है। इस दौरान किया गया गया शिव पूजन शुभ फलदाई है। महाशिवरात्रि व्रत के साथ संक्रांति भी पड़ रही है। जिससे व्रतधारी दोहरे संयोग का लाभ प्राप्त करेंगे। बुध कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और सूर्य से उनका मिलन होगा।


महाशिवरात्रि के दिन भक्ति भाव और श्रद्धा से शिव पूजन करें। अगर संभव हो तो किसी विशिष्ट ब्राह्मण से विधि-विधान से पूजन करवाएं। रुद्राभिषेक, रुदी पाठ, पंचाक्षर मंत्र का जाप आदि करवाना शुभ होता है। व्रतधारी को ब्रह्ममूर्हत में स्नानादि के उपरांत सारा दिन भगवान शिव का नाम जाप करना चाहिए। संध्या समय पुन: स्नान करके भस्म का त्रिपुंड और रुदाक्ष की माला धारण कर कच्चा दूध, गंगा जल, दही, चंदन, घृत, अक्षत,जनेऊ, लोंग, इलायची, सुपारी, धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से शिव पूजन करें। रात्रि के पहले प्रहर में संकल्प करने के बाद दूध से स्नान तथा 'ओम हीं ईशानाय नम:' का जाप करें। द्वितीय प्रहर में दही स्नान करके 'ओम् हीं अधोराय नम:' का जाप करें। तृतीय प्रहर में घृत स्नान एवं मंत्र 'ओम हीं वामदेवाय नम:' तथा चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान एवं 'ओम् हीं सद्योजाताय नम:' मंत्र का जाप करें।


अगर आप संपूर्ण विधि विधान से व्रत करने में सक्षम न हों तो रात्रि के आरंभ में तथा अर्द्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। इतना भी न कर सकें तो पूरे दिन व्रत करके सायंकाल में भगवान शंकर की यथाशक्ति पूजा-अर्चना करके भी व्रत को पूर्ण किया जा सकता है। शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से जीवन में सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है । 

Source:Agency