बेटियों, वाकई मैं हिंदुस्तान हूं, मैं शर्मसार हूं!

By Jagatvisio :16-04-2018 07:44


कठुआ की घटना तो और भी शर्मनाक है। आठ साल की एक मासूम बच्ची जो दायां हाथ और बायां हाथ न पहचानती हो, उसके बर्बर बलात्कार और हत्या को हिंदू-मुस्लिम करार दिया गया। जबकि हुआ यह था कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ •िाले में एक शर्मनाक घटना घटी। आठ साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई। पर बात सिर्फ यहीं $खत्म नहीं हुई। इस मामले को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं पुलिस, राजनेताओं, कुछ संगठनों और वकीलों की ओर से दी गईं उसने संवेदनहीनता के नए प्रतिमान स्थापित किए। 

पिछले दो दिनों से जो घटनाएं चर्चा में हैं वह किसी भी सभ्य समाज में शोभा नहीं देती हैं। ये शर्मनाक हैं। एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इसके लिए शर्मसार हैं।'' कठुआ और बलात्कारकांड पर उठे बवाल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतत: इन शब्दों के साथ अपनी चुप्पी तोड़ी। इसके बाद उद्वेलित लोगों को आश्वस्त करते हुए उनके शब्द थे, ''देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें, हमारी मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं। पर मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कोई अपराधी नहीं बचेगा, न्याय होगा और पूरा होगा। हमारी बेटियों को न्याय मिलकर रहेगा। गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा हो ये हम सबकी जाम्मेदारी है और भारत सरकार इस जाम्मेदारी को पूरा करने में कोई कोताही नहीं होने देगी, ये मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं।''  प्रधानमंत्री का यह बयान उनकी भारतीय जनता पार्टी की बड़बोली प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी के ठीक एक दिन पहले दिए गए बयान से ठीक उलट था, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की एक बच्ची के साथ हुए पाशविक बलात्कार और उसकी हत्या, तथा उत्तरप्रदेश के उन्नाव में उन्हीं की पार्टी के एक विधायक के बलात्कार कांड पर मचे बवाल के लिए मीडिया और विपक्ष को दोषी ठहराया था।

अफसोस की उन्नाव और कठुआ बलात्कार मामलों को लेकर पूरा देश उबल रहा था। सोशल मीडिया पर सेलीब्रिटी सितारों से लेकर सड़क पर विरोध हो रहा था। कांग्रेस ने पीड़ितों के लिए न्याय की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला था, जिसमें उसके अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी भी शरीक हुए थे। संभवत: इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की देर से की गई टिप्पणी पर ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुटकी लेते हुए पूछा कि, ''प्रिय प्रधानमंत्री जी। आपकी लंबी चुप्पी तोड़ने के लिए शुक्रिया। आपने कहा कि हमारी बेटियों को न्याय मिलेगा। भारत जानना चाहता है कि कब?'' कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इससे ठीक पहले कहा था कि ''मैं उस पार्टी की कड़ी निंदा करता हूं जो बलात्कार को धर्म और वर्ग के आधार पर देखती है। बलात्कार को धर्म के चश्मे से देखने वाले व्यक्ति, पार्टी और सरकार की आलोचना होनी चाहिए।'' कांग्रेस ने भी ट्विटर पर कहा था, ''भाजपा की सांसद मीनाक्षी लेखी की संवेदनहीन टिप्पणी अपने अधिकारों के लिए खड़े होने वाले भारतीय नागरिकों का अपमान है। उनका बयान उनकी पार्टी की प्रतिगामी विचारधारा का द्योतक है। उनको अपने शब्द वापस लेने चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।''

याद रहे कि कठुआ और उन्नाव रेप केस को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों का जवाब देते हुए भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्नाव की घटना 10 महीने पहले की है। पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान लिया। इसमें पीड़िता ने विधायक का नाम नहीं लिया था। मीनाक्षी लेखी ने कहा था कि पीड़ित महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को चि_ी लिखी और इसमें विधायक पर आरोप लगाए, फिर कार्रवाई हुई। कठुआ रेप केस पर उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच हुई है। एसआईटी ने छह से सात लोगों को गिरफ्तार किया है। अब आइए, देखते हैं कि दोनों मामले थे क्या? और प्रशासन ने किस तरह इसे शुरुआत में काफी हलके से लिया था। शुरुआत उन्नाव की घटना से ही करते हैं, क्योंकि वह पुराना वाकिया है। हुआ यह था कि 4 जून 2017 को पीड़िता ने आरोप लगाया कि इस दिन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया। इस हादसे के बाद 11 जून को पीड़िता अपने घर से गायब हो गई। 12 जून को उसकी मां ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को औरेया से बरामद किया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। जज के सामने धारा-164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया गया।

30 जून को पीड़िता के चाचा उसे लेकर दिल्ली गए। वहां पीड़िता ने अपनी चाची को इस घटना के बारे में बताया। इसी बीच 1 अगस्त को उन्नाव पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी। इसके बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। 17 अगस्त को दिल्ली से उन्नाव वापस आकर पीड़िता ने पहली बार गैंगरेप से संबंधित तहरीर थाने में दी। पुलिस ने जांच के बाद जज के सामने धारा-164 के तहत उसका बयान दर्ज कराया। कहा जा रहा है कि इस बयान में पीड़िता ने आरोपी विधायक का नाम नहीं लिया था। पर वह लगातार प्रशासन से विधायक की गिरफ्तारी की मांग कर रही थी। 3 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता के साथ मारपीट की गई। जेल में पेट दर्द की शिकायत और खून की उल्टियां करने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

 8 अप्रैल को जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह की कोशिश की और मामला मीडिया में उछला इसके बाद डीआईजी जेल लव कुमार और डीएम उन्नाव के इस मामले की जांच सौंपी गई। पर इस जांच की गंभीरता इसी से आंकी जा सकती है कि 12 अप्रैल को यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि विधायकजी के खिलाफ दोष साबित नहीं हुआ है। उनके खिलाफ सिर्फ आरोप लगा है। पीड़िता की मां की तहरीर के आधार पर उन पर आईपीसी की धारा 363, 366, 376, 506 और पॉक्सो कानून के तहत केस दर्ज किया गया है। पर उनको सिर्फ इस आधार पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। वैसे भी केस की जांच की सिफारिश सीबीआई से कर दी गई है। वह तो 13 अप्रैल को उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई को सीधे-सीधे आरोपी विधायक को गिरफ्तार करने का आदेश देना पड़ा तब जाकर उसकी गिरफ्तारी हो सकी।

हमारा कहना है कि एक छोटी सी पर्ची पर लिखी तहरीर पर आम लोगों को तंग करने वाली पुलिस ने बलात्कार के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ इतनी नरमी क्यों बरती? बलात्कार पीड़ितों के हक की मांग करने वाले इसमें जातिगत पहलू देखते हैं। मुख्यमंत्री, पुलिस प्रमुख और विधायक एक ही जाति के हैं। फिर विधायक दबंग भी है। आजादी के बाद से ही अपने गांव की राजनीति पर उसके परिवार का कब्जा रहा है। विरोधियों को पटखनी देने के लिए कुलदीप ने तमाम मोहरे तैयार किए थे। पीड़ित परिवार के लोग भी कभी उसके मोहरे थे। भले ही सीबीआई ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया हो पर सत्ता, जाति और धन के मद में वह जमीन पर आएगा इसकी संभावना कम है। 

कठुआ की घटना तो और भी शर्मनाक है। आठ साल की एक मासूम बच्ची जो दायां हाथ और बायां हाथ न पहचानती हो, उसके बर्बर बलात्कार और हत्या को हिंदू-मुस्लिम करार दिया गया। जबकि हुआ यह था कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ जाले में एक शर्मनाक घटना घटी। आठ साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई। पर बात सिर्फ यहीं $खत्म नहीं हुई। इस मामले को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं पुलिस, राजनेताओं, कुछ संगठनों और वकीलों की ओर से दी गईं उसने संवेदनहीनता के नए प्रतिमान स्थापित किए। 

पर इस मामले में संवेदनहीनता का एक बड़ा नमूना तब सामने आया जब 10 फरवरी को दीपक खजुरिया की गिरफ्तारी के ठीक सात दिन बाद कठुआ में हिंदू एकता मोर्चा ने उनके समर्थन में रैली का आयोजन किया। प्रदर्शन में कथित तौर पर भाजपा के कुछ लोग भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर आरोपी की रिहाई की मांग कर रहे थे। इससे संबंधित कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें कथित तौर पर भाजपा नेताओं ने कहा था कि क्राइम ब्रांच को किसी की गिरफ्तारी से पहले सोचना होगा और यहां जंगल राज नहीं होगा। वीडियो में भाजपा नेता आंदोलन की धमकी देते भी सुनाई दिए। जब ये मुद्दा उछला तो सियासत इस $कदर हावी हुई कि सत्तारूढ़ पीडीपी और सहयोगी भाजपा के बीच तल्$खी बढ़ती गई। हालांकि भाजपा ने अपने विधायकों के स्टैंड से खुद को अलग कर लिया और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी किसी तरह से झुकने से इन्कार कर दिया। कठुआ में रैली के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, ''मुझे इस बात का दुख है कि पकड़े गए आरोपी के समर्थन में कठुआ में एक रैली निकाली गई। रैली में तिरंगे भी लहराए गए। यह तिरंगे का अपमान है। $कानून अपना काम करेगा।''

हालांकि इसके बाद सारे आरोपियों को गिरफ्तार करके पुलिस ने इसी महीने यानी 9 अप्रैल को आरोपपत्र दायर करना चाहा तो वकीलों के एक बड़े समूह ने इतना हंगामा किया कि 9 अप्रैल को आरोप पत्र दा$िखल नहीं हो पाया। फिर क्राइम ब्रांच ने कानून मंत्री के द$खल के बाद 10 अप्रैल को आरोप पत्र दा$िखल किया। जम्मू के कठुआ की उस अभागी बच्ची का कसूर शायद लड़की होना भर था। उसके बलात्कार की घटना अब जम्मू-कश्मीर ही नहीं पूरे देश का एक बड़ा मसला बन गया है। पर क्या इसीदिन के लिए भारत आ•ााद हुआ था। क्या यही हमारी तरक्की है?
 

Source:Agency