नक्सल क्षेत्रों के 600 कुओं के जलस्तर की 10 साल से नहीं हुई जांच

By Jagatvisio :16-05-2018 06:47


रायपुर। प्रदेश के धुर नक्सल इलाकों के कुओं का जल स्तर बढ़ा है या घटा है, इसकी रिपोर्ट केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के पास नहीं है। नक्सलियों के खौफ की वजह से प्रदेश के 50 फीसद कुओं की जांच पिछले दस साल से नहीं हुई है। जबकि भूमि जल बोर्ड की टीम को एक साल में चार बार जल स्तर की जांच करनी है।

माओवादियों के डर से टीम अंचल के गांवों में नहीं पहुंच पाती है और विभाग प्रेदश के सिर्फ पचास प्रतिशत कुओं की जांच कर जल स्तर की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 1041 कुए हैं। केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड इनमें से सिर्फ 522 कुओं के जल स्तर की जांच की है। बाकी 529 कुएं नक्सल इलाकों में होने की वजह से वर्ष 2007 से जांच नहीं हो पाई है।

प्रदेश में सबसे ज्यादा बस्तर और कांकेर में गिरा कुओं का जल स्तर

केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 27 जिले हैं, लेकिन केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड टीम के रिकार्ड में 15 जिले दर्ज हैं। जल स्तर की जांच रिपोर्ट भी चौंकाने वाली है। प्रदेश में सबसे ज्यादा बस्तर और कांकेर के कुओं के जल स्तर में गिरावट आई है, जो सौ फीसद तक है। तीसरे नंबर पर महासमुंद जिला है, जहां कुओं का जल स्तर 95 फीसद गिरा है।

जांच रिपोर्ट की स्थिति

बस्तर में नौ कुओं की जांच हुई, जिनमें सौ फीसद गिरावट, बिलासपुर में 65 कुओं में 89 फीसद, दुर्ग में 47 कुओं में 85 फीसद, जांजगीर चांपा में 42 कुओं में 73 फीसद, जशपुर में 48 कुओं में 83 फीसद, कांकेर में दो कुओं में सौ फीसद, कवर्धा में16 कुओं में 81 फीसद, कोरबा में 42 कुओं में 69 फीसद, कोरिया में 11 कुओं में 54 फीसद, महासमुंद 21 कुओं में 95 फीसद, रायगढ़ में 59 कुओं में 76 फीसद, रायपुर में 57 कुओं में 89 फीसद, राजनांदगांव में 33 कुओं में 90 फीसद और सूरजपुर में 51 कुओं की जांच की गई, जिनमें 52 फीसद जल स्तर गिरा है।

वर्ष में चार बार होना है कुओं के जल स्तर की जांच

केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि अप्रैल में प्री मानसून, अगस्त में मानसून पीरियड, नवंबर में पोस्ट मानसून और जनवरी में पूरे कुओं की जांच के बाद ईयर बुक का रिकार्ड बनता है। उन्होंने बताया कि धुर नक्सल इलाकों के कुओं का जांच नहीं हो पा रही है।

- प्रदेश के धुर नक्सल इलाके में कुओं की जांच वर्ष 2007 से नहीं हो पाई है। इसकी प्रमुख वजह है कि कर्मचारियों को ग्रामीण अंचल में जांच के लिए जाने पर काफी दिक्कतें आती हैं। - अशोक विश्वाल, सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट रायपुर

Source:Agency