CG : सिर्फ दो फीसदी स्कूलों में गैस चूल्हे पर बन रहा मध्यान्ह भोजन

By Jagatvisio :09-06-2018 08:56


रायपुर। राज्य के स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पकाने वाले रसोइयों के साथ बच्चे भी लकड़ी के धुएं की मार झेल रहे हैं। दरअसल, स्कूलों में गैस सिलेंडर से भोजन पकाने के मामले में छत्तीसगढ़ पिछड़ा हुआ है। महज दो फीसद स्कूलों में ही सिलेंडर का इस्तेमाल हो रहा है।

इसकी वजह स्कूलों में चूल्हे के लिए बजट नहीं होना बताया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने गैस सिलेंडर के लिए तो रकम दी, लेकिन चूल्हे के लिए बजट हीं नहीं मिल पाया। ऐसे में सालभर लकड़ी और कंडे से चूल्हे पर भोजन पका। अब केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने 40 करोड़ रुपये की मांग की है। केंद्र चूल्हे के लिए रकम देगा तभी स्कूलों में बच्चों को प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने गैस से मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए बजट राशि के साथ कुकिंग कॉस्ट बढ़ाई थी। बजट में 8 से 10 फीसद बढ़ोतरी करने पर राज्य सरकार को सालाना 16 करोड़ रुपए अतिरिक्त भार सहने के बाद भी स्कूलों में परम्परागत चूल्हे से ही मध्यान्ह भोजन पकाया जा रहा है।

सरकार ने स्कूलों में गैस सिलेंडर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्राइमरी में 20 और अपर प्राइमरी में 30 पैसे अपने कोष से देने की स्वीकृति दी थी, इसके बाद भी नतीजा सिफर रहा। पिछले साल की स्थिति में देखें तो राज्य के 44975 प्राइमरी-मिडिल स्कूलों में सिर्फ 1064 स्कूलों में ही मध्यान्ह भोजन रसोई गैस में पकाया गया।

कुछ जिलों में मिला बेहतर प्रतिसाद

प्रदेश में कोरिया में सबसे अधिक 723 स्कूलों में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल मध्यान्ह भोजन पकाने में हो रहा है। प्रदेश के बीजापुर, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, कोण्डागांव, नारायपुर, सुकमा में लकड़ी के चूल्हे ही जल रहे हैं।

इसलिए नहीं हो पाया मकसद पूरा

अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में राज्य सरकार ने कुकिंग कास्ट बढ़ाकर प्रोत्साहित तो किया, लेकिन गैस चूल्हे के लिए अतिरिक्त बजट नहीं दिया। लोक शिक्षण संचालनालय के अफसर ग्राम पंचायत व नगरीय पंचायतों को पत्र लिखकर गैस चूल्हे की खरीदारी करने के लिए कई बार कह चुके हैं। जिला प्रशासन के अफसर इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। चूल्हे के लिए पैसे नहीं मिलने को वजह बताई गई है।

- गैस सिलेंडर और चूल्हे के लिए केंद्र सरकार से बजट मांगा गया है। 40 करोड़ रुपये यदि मिल जाएं तो प्रदेश के सभी स्कूलों में चूल्हा दिया सकता है। - एस प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

Source:Agency