रायपुर निगम ने खरीदे 45 लाख के बायो टॉयलेट, नहीं लगाने दे रहा रेलवे

By Jagatvisio :11-06-2018 08:49


रायपुर। भले ही केंद्र सरकार ने रायपुर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया है, लेकिन एक क्षेत्र ऐसा है जहां के 1200 घरों में टॉयलेट (शौचालय) नहीं है। नगर निगम ने डब्ल्यूआरएसए कॉलोनी का सर्वे किया, घर-घर पक्के टॉयलेट बनाने का निर्णय लिया, लेकिन रेलवे ने आपत्ति लगा दी। निगम ने यह तक कहा कि बस्ती हटाने पर इन्हें भी हटा देना, तब भी रेलवे राजी नहीं हुआ।

इसके बाद निगम ने प्री-फैब टॉयलेट खरीदे, जिन्हें बस्ती हटने पर हटाया भी जा सकता है। ऐसे 14 टॉयलेट में से सात को चार महीने पहले कॉलोनी में पहुंचाया गया, लेकिन इन्हें भी रेलवे स्थापित करने नहीं दे रहा।

कई बार निगम पत्र-व्यवहार कर चुका है, लेकिन रेलवे मानने को तैयार ही नहीं है। यह तो गनीमत है कि केंद्रीय ओडीएफ, स्वच्छता टीम इस बस्ती में अब तक नहीं पहुंची, वरना निगम को खासे नुकसान का सामना करना पड़ता, जबकि गलती रेल मंडल की है।

'रायपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम तन्मय मुखोपाध्याय से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। कॉलोनी के लोग आज भी शौच के लिए खुले में जाते हैं। यहां सवाल यह है कि जब लोग घर बनाकर रहे हैं तो इन्हें शौचालय निर्माण या फिर निगम को वैकल्पिक व्यवस्था करने क्यों नहीं दिया जा रहा?

कैसे काम करता है प्रीफैब टॉयलेट

ये असेंबल टॉयलेट है। यानी ऊपर का हिस्सा अलग और नीचे का टैंक अलग। टैंक को जमीन में दो से तीन फीट अंदर लगाया जाता है, इसके ऊपर टॉयलेट रखे जाते हैं। इससे गंदगी फैलने, उससे होने वाली बीमारियों का खतरा शून्य हो जाता है। इन्हें निकालकर दूसरी जगहों शिफ्ट किया जा सकता है।

रेल मंत्रालय दे चुका है आदेश

महापौर प्रमोद दुबे का इस संबंध में कहना है कि पूर्व में रेल मंत्री ने रेलवे जीएम को आदेश दिए थे कि डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में बसे लोगों को शौचालय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए। हम देने को तैयार भी हैं, लेकिन रेलवे के अफसर ही पीएम की योजना को पूरा नहीं होने दे रहे। उधर निगम आयुक्त रजत बंसल का कहना है कि प्रीफैब टॉयलेट लगाने जा रहे हैं, लेकिन वे अनुमति नहीं दे रहे।

रेलवे ने आपत्ति की है

पिछले साल ई-टॉयलेट की खरीदी की गई थी, ताकि जिन क्षेत्रों में स्थाई टॉयलेट का निर्माण नहीं हो सकता वहां लोग इनका इस्तेमाल कर सकें। डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में इन्हें रखा गया है, लेकिन उपयोग शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि रेलवे की आपत्ति है। - हरेंद्र साहू, नोडल अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन, नगर निगम

Source:Agency