राजघराने के स्कूल में पढ़ेंगे सब्जी बेचने वाले और मजदूरों के बच्चे

By Jagatvisio :12-06-2018 08:22


रायपुर। जिस राजकुमार कॉलेज (आरकेसी) में देश के राजघरानों, बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के बेटा-बेटियां पढ़ते हैं, वहां सब्जी बेचने वाले और मजदूरों के बच्चों को पढ़ने का मौका मिला है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम(आरटीई) के तहत यहां लॉटरी निकालने के बाद छह बच्चों का आरकेसी में दाखिला हुआ है।

इसी तरह केपीएस, रामकृष्ण विद्यालय, विजन पब्लिक स्कूल, क्रायोजनिक पब्लिक स्कूल, रेनबो स्कूल, महर्षि विद्या मंदिर, विवेकानंद स्कूल के लिए चयन सूची जारी हुई।

जेएन पांडेय स्कूल के नोडल अधिकारी व प्राचार्य एमआर सावंत ने वीर छत्रपति शिवाजी स्कूल,हरिनाथ एकेडमी स्कूल, संस्कार भारती स्कूल के लिए लॉटरी निकाली। सोमवार को 100 नोडल के अंतर्गत आने वाले 500 से अधिक स्कूलों के लिए लॉटरी निकाली गई है। 17 नोडल के अंतर्गत स्कूलों में मंगलवार को भी लॉटरी निकाली जाएगी। रायपुर में 8500 सीटों के मुकाबले करीब 12500 आवेदन आए हैं।

केस एक

पिता बेचते हैं सब्जी, मां मजदूर

पुरानी बस्ती सोनकरपारा के रहने वाले देवचरण सोनकर की बेटी कोमल सोनकर(4) का दाखिला नर्सरी कक्षा में राजकुमार कॉलेज में होगा, इनका चयनित हुआ है। देवचरण शास्त्री मार्केट में सब्जी बेचते हैं।

कोमल की मां शैलेंद्री सोनकर मजदूरी करती है। एक बेटा और एक बेटी है। बहुत खुशी हो रही है । देवचरण कहते हैं कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतने बड़े स्कूल में बेटी का दाखिला हो पाएगा। इसी तरह अन्य में ड्राइवर, मजदूरों के बच्चों का भी चयन हुआ है।

केस दो

मां पढ़ाएंगी ट्यूशन, ताकि बेटी आरकेसी में पढ़ सके

आरकेसी में नर्सरी कक्षा के लिए चयनित लीशा निषाद की मां चंद्रिका अपनी बेटी का आरकेसी में चयन होने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। किराए के घर में रहने वाली चंद्रिका पढ़ी लिखी हैं, घर में ही बच्चों के खर्च निकालने के लिए ट्यूशन पढ़ाती हैं।

चंद्रिका का कहना है कि उनके घर में आज तक कोई अंग्रेजी माध्यम में नहीं पढ़ा है। पति भूपेंद्र प्राइवेट नौकरी करके घर का खर्च निकालते हैं। मायाराम सुरजन स्कूल की नोडल अधिकारी व प्राचार्य भावना तिवारी ने बताया कि आरकेसी में छह बच्चों का चयन हुआ है।

कई महारथी निकल चुके आरकेसी से

आरकेसी 1882 में अस्तित्व में आया। तब यहां छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओड़िसा समेत देश के कई राज्यों के राजपरिवार के बच्चे तालीम हासिल करते थे। आजादी के बाद बड़े घरानों के बच्चों के पढ़ने का केंद्र भी यही रहा।

यहां से पढ़कर निकलने वालों में राजा व पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव, पूर्व चीफ जस्टिस जी.बी. पटनायक, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के पूर्व चेयरमेन बेहुरिया, खरसिया के राजकुमार त्रिभुवन दाम, बॉलीवुड के विजयेन्द्र घाटगे, खुद स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप के बच्चे, प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों के बच्चे अभी भी यहां पढ़ रहे हैं।

आरटीई में क्या है

शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीट पर उस इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गरीब बच्चों को दाखिला देना अनिवार्य है। प्राइमरी के लिए 7000 रुपये पढ़ाई, 250 रुपए यूनीफार्म और 400 रुपए पुस्तक-कापी , मिडिल में 11400 रुपये पढ़ाई व 650 रुपए यूनीफार्म व पुस्तक के लिए राज्य सरकार देती है। ऐसे निजी स्कूलों में 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक फीस है जो कि गरीबों के वश के बाहर है।

बचे स्कूलों की मंगलवार को लॉटरी

लॉटरी निकालने का सिलसिला स्कूलों में सुबह से ही शुरू हो गया था। पालकों की मौजूदगी में सीट दी गई है। बची सीटों पर मंगलवार को लॉटरी निकलेगी। - एएन बंजारा, डीईओ, रायपुर।

Source:Agency