संभावना भरी मुलाकात

By Jagatvisio :13-06-2018 08:43


कल तक एक-दूसरे को नेस्तनाबूद करने की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया प्रमुख किम जोंग उन जब सिंगापुर में मिले तो पूरी दुनिया में उत्सुकता बनी। इस ऐतिहासिक शिखर वार्ता के बाद हुए समझौते में जहां किम जोंग उन ने पूर्णत: परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये प्रतिबद्धता जताई तो वहीं अमेरिका ने प्योंगयांग को सुरक्षा की गारंटी दी। कुल मिलाकर अमेिरका और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों का नया युग शुरू हुआ, वहीं शेष दुनिया ने पिछले दिनों मंडराते युद्ध के बादलों के छंटने के बाद चैन की सांस ली। वार्ता खत्म होने के बाद दोनों नेताओं ने साझे बयान पर हस्ताक्षर भी किये। ट्रंप ने मीडिया वार्ता के बाद संकेत दिये कि उत्तर कोिरया में शीघ्र ही परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया पर काम शुरू हो जायेगा। दुनिया भर में इस बात की जिज्ञासा थी कि दोनों नेताओं की तुनकमिजाजी के अलावा उम्र का जो लंबा फासला है, वह क्या इस वार्ता को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचा पायेगा। जहां डोनाल्ड ट्रंप 71 साल के हैं, वहीं किम जोंग उनसे आधी से भी कम उम्र यानी 34 साल के हैं। नि:संदेह कोरिया प्रायद्वीप को युद्ध की विभीषिका से बचाने की दिशा में इस पहल को पूरी दुनिया में सकारात्मक प्रतिसाद मिला है।
बहरहाल, सिंगापुर के सैंटोसा द्वीप में हुई इस शिखर वार्ता को जहां दुनिया में शांति कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दुनिया से अलग-थलग रहने वाले उत्तरी कोरिया के दुनिया से जुड़ने का अवसर है। निश्चित रूप से यह घटनाक्रम कोरियाई द्वीप में सामरिक रणनीति में बदलाव का वाहक बन सकता है। डेढ़ साल तक एक-दूसरे को तबाह करने की धमकी देने वाले ट्रंप व किम जब बातचीत के लिये राजी हुए तो दुनिया के देशों ने सुकून महसूस किया। निश्चित रूप से सवाल  उठ रहे हैं कि क्या इस शिखर वार्ता के बाद चीन व उत्तर कोरिया के रिश्तों में फर्क आयेगा? क्या अमेिरका उत्तर कोरिया के ज्यादा करीब आयेगा? क्या यह कदम कोरियाई एकीकरण की दिशा में बढ़ेगा? निश्चित रूप से यह वार्ता संभावनाओं से भरी है। यहां सवाल उत्तर कोरिया की जर्जर अर्थव्यवस्था का भी है और उत्तर कोरिया में मानवाधिकार हनन के मुद्दे का भी। यह भी कि उस पर लादे गये आर्थिक प्रतिबंधों को अमेरिका कितनी जल्दी हटाता है? इससे पहले किम जोंग उन ने अपने दो परमाणु परीक्षण केंद्रों को नष्ट करके  और तीन अमेरिकी नागरिकों को रिहा करके संदेश देने का प्रयास किया था कि वह निरस्त्रीकरण की दिशा में गंभीर हैं।
 

Source:Agency