हिल्सा से करीब 300 और भारतीय तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

By Jagatvisio :06-07-2018 07:13


काठमांडो: तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटने के दौरान खराब मौसम के कारण नेपाल के पहाड़ी इलाके हिल्सा में फंसे करीब 300 और भारतीयों को गुरुवार को निकाल लिया गया. हेलीकॉप्टर लगातर फंसे हुए श्रद्धालुओं को निकालने के लिए चक्कर लगा रहे हैं. भारतीय दूतावास ने यहां बताया कि हिल्सा से आज 275 लोगों को निकाला गया. बीते तीन दिनों में 675 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. हिल्सा में आधारभूत सुविधाएं नहीं है जबकि सिमीकोट में यात्रियों को उतारने, संचार और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं.

दूतावास ने कहा कि पिछले तीन दिन में, करीब 675 लोगों को हिल्सा से सिमिकोट पहुंचाया गया है. इस दौरान 53 उड़ानों का संचालन किया गया और सेना और एमआई 16 के हेलीकॉप्टर समेत हेलीकॉप्टरों ने 142 फेरे लगाए. दूतावास ने एक बयान में बताया कि मिशन ने हिल्सा और सिमिकोट के बीच 55 उड़ानों का संचालन किया और हिल्सा से 275 श्रद्धालुओं को निकाला. हिल्सा और सिमिकोट के बीच उड़ानें जारी हैं.

उसने कहा कि मिशन में एक फेरे में अतिरिक्त 20-25 श्रद्धालुओं को निकालने के लिए निजी एमआई-16 हेलीकॉप्टर भी सेवा में लगाया है. हेलीकॉप्टर दो-तीन फेरे लगा सकते है. सिमिकोट और सुरखेत में मिशन का अस्थायी दफ्तर पूरी तरह से काम कर रहा है. 


दूतावास ने कहा कि पिछले तीन दिनों में फंसे हुए 883 तीर्थयात्रियों को सिमिकोट से नेपालगंज और सुरखेत पहुंचाया गया है. तीर्थयात्रियों को सुरखेत से नेपालगंज ले जाने के लिए बस सेवा मुहैया कराई गई है. मौसम में सुधार के साथ ही , आज दोपहर को दूतावास ने 26 उड़ानों का संचालन किया और नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर ने एक फेरा लगाया और 389 श्रद्धालुओं को सुरखेत और नेपालगंज पहुंचाया. दूतावास सभी श्रद्धालुओं को सड़क रास्ते से सुरखेत से नेपालगंज पहुंचाने के लिए सात बसें चला रहा है. खराब मौसम के कारण सोमवार तक जिले में विमानों का आवागमन बाधित हो गया था. 

स्थानीय मीडिया की खबर में कहा गया है कि वहां विमानों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन का कम दबाव होना बड़ी चिंता है. इस साल ऑक्सीजन की कमी के कारण पहले ही आठ श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. बहरहाल , भारतीय दूतावास के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पिछले करीब छह दिन में फंसे होने के कारण सिर्फ एक मौत हुई है. 

अधिकारी ने कहा, "अन्य सभी मौतें विभिन्न स्थानों पर (मई से) पूरी यात्रा के दौरान हुई हैं. इनका तीर्थयात्रियों के फंसने से कोई संबंध नहीं है." दूतावास ने भावी श्रद्धालुओं के लिए आज एक संशोधित परामर्श जारी किया. इसमें कहा गया, "भावी श्रद्धालु यात्रा शुरू करने से पहले अपनी चिकित्सा जांच करा लें और साथ ही एक महीने के लिए पर्याप्त दवाइयां साथ में रखें." 

उसने कहा, "सिमीकोट और हिल्सा दुनिया के शेष हिस्सों से केवल वायु मार्ग से जुड़े हैं. इन दो स्थानों तक जाने तथा आने का कोई और तरीका ही नहीं है. इन स्थानों और इससे जुड़े स्थानों में उचित मौसम को देखते हुए ही छोटे विमान / हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकते हैं क्योंकि यह बेहद ही दुर्गम क्षेत्र है." 

दूतावास ने कहा कि उसने भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के नागरिकों के बीच भेद नहीं किया है और अन्य देशों लोगों को भी निकाला है. दूतावास ने श्रद्धालुओं और उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक हॉटलाइन स्थापित की है जिसमें तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषी कर्मचारी भी हैं. 
 

Source:Agency