रावघाट रेललाइन परियोजना : 108 किसानों को बंटेगा 152 करोड़ का मुआवजा

By Jagatvisio :10-07-2018 08:57


जगदलपुर। बस्तर के इतिहास में पहली बार रेलवे एक्ट के तहत रावघाट-जगदलपुर रेललाइन के लिए जारी जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई में एक-एक भूस्वामी को करोड़ों रूपये का मुआवजा दिया जा रहा है। नए भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत निर्धारित मुआवजा दर पूर्व के कानून में प्रावधानित मुआवजा दर से लगभग चार गुना बताई जा रही है।

बस्तर जिले में अकेले जगदलपुर राजस्व अनुविभाग में कंगोली, अगहनपुर, पल्ली और घाटपदमूर क्षेत्र में रेललाइन के रास्ते में 108 खातेदारों की आने वाली 28.102 हेक्टेयर निजी जमीन के लिए 152 करोड़ रूपये की मुआवजा राशि तय की गई है। मुआवजा का वितरण शुरू हो चुका है।

कुछ ऐसे खातेदार जिन्होंने अपनी कृषि भूमि का डायवर्सन करा लिया था। उन्हें करोड़ों रुपए मुआवजा मिलेगा वहीं ऐसे भूस्वामी जो जमीन का डायवर्सन नहीं करा सके उन्हें इन किसानों के मुकाबले कई गुना कम मुआवजा राशि मिलने जा रही है।

बस्तर अनुविभाग को भी राशि का आबंटन जिला प्रशासन ने कर दिया है। वहां भी मुआवजा राशि का वितरण जल्दी ही शुरू होने वाला है। बस्तर में कभी मुआवजा में इतनी बड़ी राशि नहीं आई थी। नया भूमि अधिग्रहण कानून आने से जमीन के रेट इतने अधिक हुए हैं।

एमओयू के बाद समझ आई जमीन की कीमत 

जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहला एमओयू दिसंबर 2007 में हुआ था। 11 साल पुराने इसी एमओयू के तहत रावघाट से दल्लीराजहरा के बीच 95 किलोमीटर की रेललाइन का निर्माण कार्य चल रहा है।

इस पुराने एमओयू में प्रथम चरण का काम पांच साल में पूरा करने के बाद दूसरे चरण में 2012-13 में जगदलपुर-रावघाट के बीच 140 किलोमीटर में काम शुरू करने का जिक्र था।

इस दौरान केन्द्र में एनडीए की नई सरकार आने के बाद पुराने एमओयू से द्वितीय चरण की कार्ययोजना को अलग कर जगदलपुर-रावघाट रेललाइन के लिए 9 मई 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दंतेवाड़ा की जनसभा में सेल, इरकॉन, एनएमडीसी और छग शासन के बीच नया एमओयू किया गया।

पहले एमओयू के बाद ही रावघाट रेललाइन के सर्वे में चिंहाकित जमीन की कीमत समझ आ गई थी और किसानों ने जमीन का डायवर्सन कराकर अपनी कृषि भूमि की कीमत कई गुना बढ़ा ली थी। जिसका फायदा मुआवजा वितरण में दिखाई दे रहा है।

एक अरब से अधिक राशि 4-5 लोगों में ही बंट जाएगी

रेललाइन के रास्ते में आने वाली परिवर्तित भूमि के अकेले चार-पांच भूस्वामियों को ही सौ करोड़ रूपये से अधिक की मुआवजा राशि बांटी जानी हैं। बाकी आधा करोड़ की रकम लगभग सौ किसानों के हिस्से आएगी। एसडीएम कार्यालय में आकर कुछ बड़े लोग मुआवजा की बड़ी राशि का चेक ले चुके हैं।

अब अधिकांश छोटे किसान बच गए हैं और प्रशासन द्वारा उन्हें भी राशि का चेक प्राप्त करने सूचित किया जा रहा है। भूमि को परिवर्तित कराने के बाद एक दो भूस्वामियों ने कहीं कहीं निर्माण कार्य भी कराना शुरू कर दिया था बाद में रेललाइन गुजरने की बात सामने आने पर निर्माण रोक दिया और जमीन रेलवे को देने हामी भर दी।
 

Source:Agency