भारतीय सेना में जासूसी के बढ़ते मामले

By Jagatvisio :24-09-2018 07:45


जासूसी के कार्यों के लिए आज भी भले ही महिलाओं को इस्तेमाल किया जाता हो किन्तु आधुनिक तकनीक और साइबर व सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते इन्हें दूसरे देश भेजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती बल्कि अपने देश में ही रहकर ये महिला जासूस या ऐसे ही छद्म जासूस इन्हीं आधुनिक तकनीकों के सहारे यह काम बखूबी कर रहे हैं। सोशल मीडिया के सहारे की जाने वाली इस तरह की जासूसी को ही 'हनी ट्रैप' नाम दिया गया है। दुश्मन देश की सैन्य रणनीति के राज जानने के लिए खूबसूरत महिलाओं को जासूस रूपी हथियार बनाकर जासूसी के लिए इस्तेेमाल करना ही 'हनीट्रैप' कहलाता है। अमेरिका, रूस, चीन, जापान सरीखे विकसित देशों में हनीट्रैप के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। हनीट्रैप के लिए देश की खुफिया एजेंसियां महिला जासूसों को ये जिम्मेदारी सौंपती हैं, जिसके बदले में उन्हें मोटी कीमत अदा की जाती है।

अभी 18 सितम्बर को उत्तर प्रदेश एटीएस ने हनी ट्रैप का शिकार हुए बीएसएफ  के एक जवान अच्युतानंद मिश्रा को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया है। एटीएस के मुताबिक जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई खूबसूरत लड़कियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर सुरक्षा बलों के लोगों को मोहब्बत के जाल में फंसाकर जासूसी करा रही है। दरअसल एटीएस की काउंटर एसपायोनेज टीम ऐसी इंडियन फेसबुक आईडी की जांच कर रही थी, जो आईएसआई की फेक फेसबुक आईडी के सम्पर्क में हैं और उसी दौरान उनकी नजर में बीएसएफ  का अच्युतानंद मिश्रा आया, जिसने पूछताछ के दौरान बताया कि आईएसआई एजेंट ने स्वयं को डिफेंस रिपोर्टर बताया था, जिसने पहले उससे रसीली बातें कीं, फिर शादी का वादा किया और उसके बाद उससे जासूसी कराने लगी। एटीएस और बीएसएफ  की टीम ने दिल्ली और नोएडा में दो दिन तक इसी सिलसिले में अच्युतानंद मिश्रा से पूछताछ की और इस दौरान उसके मोबाइल और फेसबुक से हनीट्रैप के तमाम साक्ष्य मिले।

आईएसआई भारतीय सेना में अपने जासूसों को घुसाने के लिए जिस प्रकार के तौर तरीकों का इस्तेमाल कर रही है, वह बेहद चिंतनीय है। भारतीय सेना में इस प्रकार के जासूसी के मामले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की नापाक साजिशों के चलते जिस तरह अब रह-रहकर सामने आ रहे हैं, वो देश की सुरक्षा की दृष्टि से गहन चिंता का विषय हैं। कुछ माह पूर्व हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर से गौरव नामक युवक को पकड़ा गया, जिसे आईएसआई की दो महिला जासूसों ने फेसबुक के माध्यम से फेक आईडी के जरिये सेना में भर्ती होने के बाद सेना से जुड़ी जानकारियां देने के लिए तैयार किया था और उसे सेना में भर्ती होने वाले अन्य युवकों से भी सम्पर्क बनाकर उनसे जानकरियां हासिल कर इन महिला जासूसों को उपलब्ध कराने के लिए लालच दिया गया था। गौरव ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर 'इंडियन आर्मी' लिखा था, इसीलिए आईएसआई द्वारा सैन्य जानकारियां हासिल करने के लिए उसे निशाना बनाया गया और वह अमिता अहलूवालिया तथा सोनू कौर नाम से फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल वाली आईएसआई की दो महिला जासूसों के जाल में बड़ी आसानी से फंस गया। दरअसल आईएसआई का लक्ष्य सेना में अपने एजेंट घुसाने के साथ-साथ सेना के ट्रेनिंग सेंटरों की आंतरिक जानकारियां हासिल करना भी है, जिसके लिए सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे गौरव को इन जासूसों ने 'हनीट्रैप' में फंसाकर राजी कर लिया कि वह भर्ती सेंटरों की जानकारी व्हाट्सअप तथा स्काईप वीडियो के माध्यम से उपलब्ध कराता रहे, साथ ही भर्ती में शामिल होने के दौरान साथी अभ्यर्थियों से भी सम्पर्क बढ़ाए।

इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारी व सैन्यकर्मी आईएसआई की ऐसी महिला जासूसों के मनमोहक जाल में फंसकर सेना की गोपनीय सूचनाएं लीक करते पकड़े गए हैं। ज्यादा समय नहीं हुआ, जब वायुयेना के वरिष्ठ अधिकारी अरूण मारवाह और थलसेना के एक अधिकारी को सेना में जासूसी के आरोप में दबोचा गया था और ये मामले उस समय देशभर में सुर्खियां बने थे। तब यह भी उजागर हुआ था कि आईएसआई कैसे सोशल मीडिया के जरिये युवाओं, सैन्यकर्मियों व सेना अधिकारियों को महिला एजेंटों के जरिये अपने जाल में फंसाने में सफल हो रही है। हालांकि एक देश द्वारा दूसरे देश की सैन्य जासूसी कराने के मामले कोई नई बात नहीं है बल्कि सदियों से यह सब चला आ रहा है। कभी इस कार्य के लिए खूबसूरत लड़कियों को जासूस बनाकर दूसरे देश इसी कार्य के लिए भेजा जाता था, जिन्हें 'विषकन्या' नाम दिया जाता था। माताहारी जैसी बेहद खूबसूरत जासूसों के किस्से प्राय: सुने ही होंगे, जिन्हें दूसरे देशों में वहां के सैन्य अधिकारियों को उनकी खूबसूरती के जाल में फंसाकर उस देश की जासूसी के लिए भेजा जाता था। उस समय इन विषकन्याओं को जासूसी के आरोप में पकड़े जाने पर सजा के रूप में गोली से उड़ा दिया जाता था किन्तु अब जासूसी के तौर-तरीके पूरी तरह बदल गए हैं।

जासूसी के कार्यों के लिए आज भी भले ही महिलाओं को इस्तेमाल किया जाता हो किन्तु आधुनिक तकनीक और साइबर व सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते इन्हें दूसरे देश भेजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती बल्कि अपने देश में ही रहकर ये महिला जासूस या ऐसे ही छद्म जासूस इन्हीं आधुनिक तकनीकों के सहारे यह काम बखूबी कर रहे हैं। सोशल मीडिया के सहारे की जाने वाली इस तरह की जासूसी को ही 'हनी ट्रैप' नाम दिया गया है। दुश्मन देश की सैन्य रणनीति के राज जानने के लिए खूबसूरत महिलाओं को जासूस रूपी हथियार बनाकर जासूसी के लिए इस्तेेमाल करना ही 'हनीट्रैप' कहलाता है। अमेरिका, रूस, चीन, जापान सरीखे विकसित देशों में हनीट्रैप के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं। हनीट्रैप के लिए देश की खुफिया एजेंसियां महिला जासूसों को ये जिम्मेदारी सौंपती हैं, जिसके बदले में उन्हें मोटी कीमत अदा की जाती है।

हनी ट्रैप' अर्थात् शहद जैसा ऐसा मीठा जाल, जिसमें फंसने वाले सेना अधिकारियों को आभास तक नहीं होता कि वो किस जाल में फंसते जा रहे हैं। दुश्मन देश की रणनीति जानने के लिए आज लगभग सभी देश 'हनीट्रैपÓ का सहारा ले रहे हैं और आजकल इसके लिए फेसबुक तथा व्हाट्सएप का काफी इस्तेमाल हो रहा है। हनीट्रैप से जुड़ी महिला जासूस पहले फंसाये जाने वाले शख्स से दोस्ती करती है और फिर इसी दोस्ती की आड़ में उससे सैक्स चैट, सैक्स अथवा अन्य प्रकार के संबंध बनाकर उसे अपने हसीन जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करती हैं और बदले में उससे देश से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जुटाती हैं। दिल्ली पुलिस के सूत्रों की मानें तो हनीट्रैप के लिए आईएसआई ही फेसबुक प्रोफाइल तैयार करती है और फर्जी फेसबुक प्रोफाइल वाली महिला एजेंटों की टाम को ही 'साइबर आर्मी' नाम दिया जाता है। फेसबुक प्रोफाइल पर प्राय: ऐसी महिला एजेंटों को ही रखा जाता है, जो बेहद खूबसूरत हों ताकि वे जाल में फंसाए जाने वाले शख्स को वीडियो कॉल के जरिये अपने असली होने का सबूत दे सके। एक बार जब कोई इनके जाल में फंस जाता है तो उससे कुछ सूचनाएं हासिल कर उसे लगातार ब्लैकमेल कर इसके लिए बाध्य किया जाता है यानी यह ऐसा खूबसूरत मकड़जाल है, जिसमें एक बार फंसने के बाद बाहर निकलना लगभग नामुमकिन होता है।

जमीनी लड़ाई में भारत से पिटता रहा पाकिस्तान आईएसआई के माध्यम से भारतीय जवानों व अधिकारियों को ऐसी ही हसीनाओं के 'हसीन' जाल में फंसाकर गुप्त राज हासिल करने की जुगत में काफी समय से लगा है लेकिन अब जिस प्रकार दुश्मन देश को सूचनाएं लीक करने के मामले में सेना के बड़े अधिकारी भी पकड़े जाने लगे हैं तो स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझा जाता है। किसी देश की सैन्य जासूसी करते हुए दूसरे देश के जासूसों का पकड़ा जाना एक सामान्य बात है लेकिन जासूसी के ऐसे मामलों में दुश्मन देश के लिए जासूसी करते हुए जब अपने ही देश के लोग और वो भी अपनी ही सेना के बड़े अधिकारी पकड़े जाने लगें तो वाकई गहन चिंता की बात है। 

उल्लेखनीय है कि 2014 में सेना के मेरठ सैन्य क्षेत्र में तैनात सुनीत कुमार को फेसबुक के जरिये आईएसआई एजेंट पूनम प्रकाश तथा रिया को सेना की महत्वपूर्ण सूचनाएं लीक करने के आरोप में हिमाचल के कांगड़ा से दबोचा गया था। सुनीत के बाद एजेंट पूनम के ही मायावी जाल में फंसे बरेली में तैनात मनोहर को पकड़ा गया था। अगस्त 2014 में आंध्र प्रदेश की सिकंदराबाद छावनी की 151 एमसी/एमएफ डिटैचमेंट में तैनात पाटन कुमार पोद्दार को भी फेसबुक के माध्यम से अनुष्का अग्रवाल नामक पाक जासूस के सम्पर्क में आने के बाद उसे खुफिया जानकारियां देने के आरोप में पकड़ा गया था।

दिसम्बर 2015 में भटिंडा एयरफोर्स स्टेशन में तैनात केरल निवासी वायुसेना के ग्रुप कैप्टन रंजीत के. के. को सोशल मीडिया पर दामिनी मैकनॉट नामक महिला जासूस के सम्पर्क में आने के बाद सेना से जुड़ी अहम जानकारियां लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि सैन्य बलों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अपने अधिकरियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं, फिर भी सोशल मीडिया का दुरूपयोग करते हुए सैन्य अधिकारियों व सैन्य कर्मियों द्वारा देश के साथ इस प्रकार गद्दारी करना सेना के लिए बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार अपने पद, तैनाती, यूनिफॉर्म तथा किसी प्रकार से अपने कार्य से जुड़ी सूचनाएं देना प्रतिबंधित है।

माना कि अपने घर-परिवार से लंबे समय से दूर देश की सीमाओं या दुर्गम स्थानों पर तैनात जवानों व अधिकारियों के लिए परिवार से सम्पर्क बनाने के लिए आधुनिक संचार माध्यम या सोशल मीडिया अच्छे माध्यम हैं लेकिन सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से दुश्मन उसका अनुचित लाभ न उठा सके, इसीलिए सेना द्वारा ये दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं लेकिन कठोर नियमों के बावजूद सेना के लालची अधिकारी या जवान यदि दुश्मन देश की इन हसीन विषकन्याओं के मायावी जाल में फंसकर देश के साथ गद्दारी करते हैं, तो यह अक्षम्य अपराध माना जाना चाहिए और ऐसे मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में त्वरित सुनवाई कराकर ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए। सेना के प्रबंधन तंत्र को भी कुछ ऐसे पुख्ता इंतजाम करने होंगे ताकि साइबर और सोशल मीडिया के जरिये हो रही इस तरह की जासूसी की घटनाओं पर अंकुश लग सके। 
 

Source:Agency