200 रुपए में बनाया ऐसा यंत्र, नहीं होगी घेंघा जैसी बीमारी

By Jagatvisio :08-10-2018 07:53


रायपुर। किसी गांव में पानी हो, लेकिन पीने योग्य न हो, उससे खेती भी न की जा सके तो आदमी करे तो करे क्या, जाए तो जाए कहां? इस गंभीर समस्या को संजीदगी से महसूस किया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के तीन छात्रों ने। उन्होंने पुरानी खराब बैटरी में लगे एक इलेक्ट्रोरेड को पानी में डाल कर पांच से 24 वोल्ट सप्लाई देकर एक लीटर पानी का आर्सेनिक अम्ल दूर कर दिया। एनआइटी की सिविल ब्रांच के तीन छात्र नितिन, कल्याण और प्रशांत ने महज पांच दिनों की मेहनत में इस यंत्र को तैयार किया, जिसे एनआइटी में हो रहे टेक्नोफेस्ट आवर्तन- 2018 में दिखाया। इसे बनाने में भी हजार, 10 हजार नहीं, मात्र दो सौ रुपये लगे। प्रदेश में आर्सेनिक अम्ल से सर्वाधिक ग्रसित गांव कौड़ीकसा है, जो राजनांदगांव में आता है। न तो यहां खेती का सही विकल्प है, न ही पीने के पानी का। कुछ साल पहले लोक यांत्रिकी विभाग ने वहां पानी शुद्घि का प्लांट लगाया है। जैसे-तैसे वह पानी पीने के योग्य तो है, लेकिन खेती के लिए अभी भी किसान ऊपरी वर्षा का इंतजार करते हैं। ऐसे में छात्रों का बनाया यंत्र किसी जीवनदान से कम नहीं है।

क्या है आर्सेनिक अम्ल
आर्सेनिक मानव शरीर के लिए जहरीला असर पैदा करता है। इसकी वजह से शरीर में घाव होने लगते हैं। अंग काम करना बंद कर देते हैं। समय पर इलाज नहीं मिला तो रोगी की मृत्यु हो जाती है। यदि ये पानी में हो तो मनुष्य और खेती दोनों के लिए नुकसानदायक है।

इस तरह काम करता है यंत्र
छात्रों एक छोटे ट्रांसफार्मर में 230 वोल्ट का एसी करंट सप्लाई करते हैं, जिसे सर्किट से डीसी में बदल कर पांच से 24 वोल्ट की सप्लाई 25 सेंटीमीटर के इलेक्ट्रोरेड को की जाती है, जो एक लीटर पानी के में डला होता है। करीब 10 मिनट के अंदर पानी का पूरा आर्सेनिक नीचे बैठ जाता है। ऊपर के साफ पानी को फिल्टर कर आसानी से पीने और खेती के लिए उपयोग किया जा सकता है।

आवर्तन में दिखा एमजे फाइव का रोमांच
दो दिवसीय आयोजन के अंतिम पड़ाव में दिन में रेसिंग बाइक और शूटिंग का लुत्फ उठाए, वहीं शाम होते ही छात्रों ने रॉक बैंड पर जमकर थिरके। मुंबई से आए एमजे फाइव बैंड में धुनों पर छात्राएं भी जमकर झूमीं। इसके साथ ही प्रदर्शनी के श्रेष्ठ तीन मॉडल को पुरस्कृत किया गया।

Source:Agency