आपके नवजात पर खतरनाक जीका वायरस की है नजर, जानें- क्‍या है मामला

By Jagatvisio :10-10-2018 07:25


नई दिल्‍ली [। राजस्थान में जीका वायरस पीड़ितों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। अब तक 29 लोग इस संक्रमण की गिरफ्त में हैं। जीका वायरस संक्रमण के मामलों को लेकर पीएमओ ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय से विस्‍तृत रिपोर्ट मांगी है। आइए हम आपको बताते हैं जीका वायरस के बारे में। इसकी खोज कब हुई, इसके बचने के क्‍या पांच उपाय हैं। इसके अलावा भारत में सरकारी स्‍तर पर इसके राेकथाम के लिए क्‍या प्रबंध है।

युगांडा में जीका नामक जंगलों में पाया गया वायरस
1947 में पहली बार इस वायरस की खोज की गई। अफ्रीका के युगांडा में जीका नामक जंगलों में पहली बार बंदरों में यह वायरस पाया गया। इसी के चलते इसका नाम जीका रखा गया। 1954 में पहली बार मानव इस वायरस की चपेट में आया। तब दुनिया ने इस खतरनाक वायरस के बारे में जाना। अफ्रीका के कई देश अब तक इसकी चपेट में आ चुके हैं। कुछ देशों में यह महामारी का रूप अख्तियार कर चुका है।

मौजूदा समय में यह वायरस केवल अफ्रीका महाद्वीप में ही नहीं, बल्कि इसकी चपेट में एशिया, लैटिन अमेरिका, यूरोप एवं आस्‍ट्रेलिया महाद्वीप भी शामिल है। 2007 में माइक्रोनेशिया के द्वीप में इस वायरस ने काफी तेज से पांव पसारा। 2013 में इसकी दस्‍तक ने फ्रांस सहम गया था। पूर्वी आस्‍ट्रेलिया तथा न्‍यू कैलिडोनिया और 2015 में ब्राजील में दस्‍तक दी। 

नवजात शिशुओं पर पर इसका असर


आमतौर पर जीका वायरस एडीज मच्‍छरों के काटने से फैलता है। डेंगू और चिकनगुनिया भी इन्‍हीं मच्‍छरों के काटने से होता है। ये मच्‍छर ज्‍यादातर दिन में या सुबह ही काटते हैं। जीका वायरस का असर किसी भी व्‍यक्ति पर हो सकता है, लेकिन इसका सबसे ज्‍यादा प्रभाव गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण पर होता है। दरअसल, जीका वायरस के हमले के फलस्‍वरूप नवजात बच्‍चे माइक्रोसेफली नामक बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। नवजात में माइक्रोसेफली एक न्‍यूरोलाजिकल समस्‍या है। इसमें बच्‍चे का सिर छोटा रह जाता है, क्‍योंकि उसके दिमाग का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है। जीका वायरस से संक्रमित मादा एडीज द्वारा गर्भवती महिला के खून के माध्‍यम से यह वायरस गर्भस्‍थ शिशु की न्‍यूरल ट्यूब को संक्रमित करता है। इसके चलते न्‍यूरल ट्यूब में मौजूद रेटनोइस एसिड को संक्रमित करता है। यह एक प्रकार का मैटाबोलिक विटामिन ए है, जो मस्तिष्‍क के आरंभिक विकास हेतु जिम्‍मेदार है। इसके संक्रमण से नवजात के मस्तिष्‍क का विकाम मंद हो जाता है।

Source:Agency