पति पर गृहस्थी को बोझ बढ़ा तो पत्नी दौड़ाने लगी ई-रिक्शा

By Jagatvisio :12-10-2018 07:57


रायपुर। नारी के अनेक रूप, कहीं मां तो कहीं पत्नी तो कहीं बहन। बात हो रही है ऐसी पत्नी की जो अपने पति पर मंहगाई के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए रोजना ई-रिक्शा चलाती है। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, घर खर्च में किसी भी तरह की परेशानी न हो, इन सभी बातों का ध्यान रखती है।

पंडरी के जगन्नाथ पारा में रहने वाली चंपा महानंद रोजाना सुबह दस बजे अपनी बेटियों को अपने ई-रिक्शे में बैठाकर स्कूल छोड़ने जाती हैं। फिर पंडरी से स्टेशन और घड़ी चौक तक सवारी को बैठाकर अपने ई-रिक्शा में फेरी लगाना चालू कर देती हैं। इससे घर की आवक बढ़ रही है। पति के ऊपर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा है।

पति के साथ से बढ़ा हौसला

चंपा बताती हैं कि मेरे पति शटर मैकेनिक हैं। रोजाना चार सौ रुपए मिलते हैं। ऐसे में तीन बेटियों और खुद का खर्च निकाल पाना कठिन था। स्थिति ये रहती थी कि घर में खाने के लिए सब्जी तक नहीं होती थी। मैं दो साल पहले जब पति से कुछ काम करने की बात की तो मुझे मना कर दिए।

उन्होंने कहा कि लोगों के घर बर्तन, झाडू का काम मत कर। बच्चियों पर गलत असर पड़ेगा। कुछ ही महीने बाद हमने ई-रिक्शा योजना जानकारी मिली। मैंने अपने पति से उसे सीखकर चालाने की बात की। वो झट से मान गए और कुछ ही दिनों में मैं सड़कों पर सवारी ले कर जाने लगी। अब रोजाना करीब पांच सौ रुपये तक की आय हो जाती है।

घर पर बना है नियम

हम दोनों ने नियम बनाया है कि घर पर रोजाना पांच बजे तक पहुंच जाना है, ताकि बच्चों को भी समय दे सकें। दोनों के काम करने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। घर के खर्च में भी किसी प्रकार दिक्कत नहीं हो रही है।

Source:Agency