छत्तीसगढ़ के जंगल में कार्बन सोखने की ताकत, इसरो कर रहा सर्वे

By Jagatvisio :12-10-2018 07:58


बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अंतर्गत पेंड्रा,मरवाही और गौरेला के जंगलों में इन दिनों इसरो के वैज्ञानिक कार्बन डाईऑक्साइड को लेकर सर्वे कर रहे हैं। प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के जंगल में कार्बन सोखने की ताकत है,जो कार्बन उत्सर्जन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।

पर्यावरण संतुलन में यह मील का पत्थर साबित होगा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) डायरेक्टर एसपीएस कुशवाहा के निर्देशन में सर्वे का काम चल रहा है। यह सर्वे छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन में सहायक होगा। सर्वे को लेकर वैज्ञानिक अभी पूरी तरह से गोपनीयता बरत रहे हैं। जंगल के भीतर मिट्टी व कार्बन की मात्रा को लेकर जांच करने में जुटे हैं।

वैज्ञानिकों की मानें तो अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी माइक्रोबायलॉजी विभाग को स्वाइल जांच करने एक सैंपल भी दिया जाएगा। जिससे यह पता लगाना आसान होगा कि जंगल में कितनी कार्बन सोखने की क्षमता है। कार्बन उत्सर्जन कम करने में जंगल अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अगर जंगल को कटने से रोका जाए तो हर साल कई टन कार्बन को जंगल सोख सकते हैं। पेड़ नुकसानदायक गैसों को सोखने के लिए किसी कूडेदान जैसी भूमिका निभाते है। जंगल वातावरण से ग्रीन हाउस गैस को कम करते हैं।

जंगल की कटाई को रोक लेते हैं तो बढ़ते जंगल जीवाश्म ईंधन आधे उत्सर्जन को हटाया जा सकता है। प्रदेश में 55 हजार 547 वर्ग क्षेत्रफल में जंगल हैं, जिसमें 560.98 टन कार्बन स्टॉक होता है। जलवायु परिवर्तन से खतरा तापमान बढ़ने से वन्य प्राणियों व आम आदमी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा।

एनर्जी, माइनिंग और इंडस्ट्रीज भी खतरे में आ जाएंगी। ऐसे में पहले से अलर्ट रहने की जरूरत है। जल संग्रहण, कार्बन उत्सर्जन व फसलों पर विशेष ध्यान देना होगा।

Source:Agency