जेआईसीए ने दिया कृषि उत्पादनशीलता को बढ़ावा

By Jagatvisio :16-10-2018 07:22


हॉर्टिकल्चर इंटेंसिफिकेशन बाय माइक्रो ड्रिप इरिगेशन प्रोजेक्ट का उद्घाटन

 

झारखण्ड,  अक्टूबर, 2018 : द झारखण्ड हॉर्टिकल्चर इंटेंसिफिकेशन बाय माइक्रो ड्रिप इरिगेशन प्रोजेक्ट का उद्घाटन झारखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री रघुबर दास ने रांची में 8 अक्टूबर, 2018 को किया था। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) इस परियोजना की विकास भागीदार है, जिसने झारखण्ड में माइक्रो ड्रिप इरिगेशन (एमडीआई) को बढ़ावा देने के लिये झारखण्ड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (डीआरडी) के अंतर्गत झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) को 4652 मिलियन जापानी येन (लगभग 300 करोड़ रू.) का ऑफिशियल डेवलपमेन्ट असिस्टेंस (ओडीए) लोन प्रदान करने के लिये भारत सरकार के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये हैं।

इस परियोजना का उद्देश्य एमडीआई प्रणालियों को बढ़ावा देने और हॉर्टिकल्चर उत्पादों की उत्पादन एवं विपणन क्षमता के विस्तार हेतु तकनीकी सहयोग के माध्यम से झारखण्ड राज्य के छोटे और हाशिये पर खड़े किसानों की आजीविका में सुधार करना है। इस परियोजना का लक्ष्य लक्षित परियोजना क्षेत्र में महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को बढ़ाना है, जिससे ग्रामीण विकास को सहयोग मिलेगा।

इस अवसर पर जेआईसीए इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि श्री ताकायोशी तांगे ने उद्घाटन सम्बोधन में कहा, ‘‘आज हम इस परियोजना का उद्घाटन कर रहे हैं और आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण होने के कगार पर हैं, जैसे टीम को रखना, आधारगत सर्वेक्षण और प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास। अब इस परियोजना का लाभ लेना जेएसएलपीएस और डीआरडी, झारखण्ड सरकार का काम है। यह परियोजना 30,000 महिला किसानों तक पहुँचेगी, जो जेएसएलपीएस द्वारा गठित स्व-सहायता समूहों की सदस्य हैं और इस परियोजना का अभिगम सर्वांगीण है, जिसमें किसानों को एमडीआई प्रणाली, पॉली नर्सरी हाउस और वर्मिन कम्पोजिट यूनिट एक पैकेज के रूप में कॉस्ट शेयरिंग आधार पर दी जाती है, साथ ही हॉर्टिकल्चर और विपणन पर गहन प्रशिक्षण भी दिया जाता है। बड़े स्तर पर यह परियोजना महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित है।’’

इस परियोजना की कई अनूठी विशेषताएं हैं। यह परियोजना छोटे और हाशिये पर खड़े किसानों पर लक्षित है, जिसने पास 0.1 हैक्टेयर कृषि भूमि है या जिन्होंने जमीन लीज पर ले रखी है। इस परियोजना से छोटे और हाशिये पर खड़े किसानों को नई प्रौद्योगिकी और अभिगमों के दर्शन होंगे, जिसका उन्हें लाभ मिलेगा। झारखण्ड में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि गतिविधियों में संलग्‍न हैं, जिनमें से 72 प्रतिशत छोटे किसान हैं, जिनके पास भूमि है और जो आजीविका के लिये कृषि करते हैं। दूसरे शब्दों में, इस परियोजना की नीति आधी जनसंख्या को सम्बोधित करती है।

इस परियोजना की एक अन्य विशेषता यह है कि किसानों को लोन के रूप में एमडीआई की कुल लागत का 35 प्रतिशत वहन करना है। यह प्रणाली नई संरचना वाली है और प्रत्येक किसान को एमडीआई प्रणाली को व्यवस्थित रखने के लिये जिम्मेदार बनाती है, ताकि वह कृषि उत्पादों की उत्पादनशीलता बढ़ाकर लोन की वापसी करे। किसानों के सहयोग के लिये ट्रैक रिकॉर्ड रखने की एक नई प्रणाली ‘‘किसान कार्ड’’ भी प्रस्तुत की गई, ताकि प्रत्येक किसान के पास निवेश की स्थिति (लिये गये लोन), फंड के उपयोग और की गई गतिविधियों का रिकॉर्ड रहे।

यह परियोजना अभी क्रियान्‍वयन के शुरूआती चरण में है और 30,000 लक्षित महिला किसानों में से अभी तक 700  किसानों द्वारा एमडीआइ सिस्‍टम को लगवाया जा चुका है।इन महिलाओं में से मुन्‍नी एक हैं। उन्‍होंने 6 महीने पहले यह सिस्‍टम लगवाया था। उन्‍होंने कहा, ''एमडीआइ सिस्‍टम लगवाने और हॉर्टीकल्‍चरल तौर-तरीकों का प्रशिक्षण लेने के बाद, मैं बेहद कम समय में ही अधिक और बेहतर क्‍वालिटी की सब्जियां उगाने में सक्षम हो गई हूं और उन्‍हें ऑफ सीजनल वेजिटेबल्‍स के रूप में बाजार में ऊंची कीमत बेच पाती हूं। मैंने एमडीआइ सिस्‍टम लगाने के रूपये का लोन लिया था और मुझे लगता है कि मैंने जो योजना बनाई थी, उससे काफी पहले से अपना लोन चुका पाउंगी। इसके साथ ही एमडीआइ सिस्‍टम ने खेती में मेरी मेहनत को कम कर दिया है और मुझे अब घर का काम करने और खुद के लिये ज्‍यादा समय मिल पाता है।'' इस प्रोजेक्‍ट से ऐसी कई अन्‍य मीहिला किसानों को सहयोग मिलने की उम्‍मीद है।

Source:Agency